पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और वैश्विक स्तर पर ईंधन आपूर्ति श्रृंखला में आ रही बाधाओं के बीच, भारत ने अपने पड़ोसी देश बांग्लादेश की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। भारत ने ‘इंडिया-बांग्लादेश फ्रेंडशिप पाइपलाइन’ (IBFP) के माध्यम से बांग्लादेश को 5,000 मीट्रिक टन डीजल की आपूर्ति शुरू कर दी है।
क्या है पूरा मामला?
ईरान, इज़राइल और अमेरिका के बीच चल रहे तनाव के कारण वैश्विक तेल बाजारों में अनिश्चितता बनी हुई है। इसका सीधा असर बांग्लादेश जैसे देशों पर पड़ा है, जो अपनी 95% से अधिक ऊर्जा जरूरतों के लिए आयात पर निर्भर हैं। इस संकट के समय में, बांग्लादेश ने भारत से अतिरिक्त डीजल आपूर्ति का अनुरोध किया था।
सरकारी सूत्रों के अनुसार, यह आपूर्ति भारत और बांग्लादेश के बीच हुए एक दीर्घकालिक ऊर्जा व्यापार समझौते का हिस्सा है। इस समझौते के तहत, भारत सालाना 1,80,000 मीट्रिक टन डीजल बांग्लादेश को भेजने के लिए प्रतिबद्ध है।
मैत्री पाइपलाइन की भूमिका
131 किलोमीटर लंबी यह पाइपलाइन भारत के सिलीगुड़ी (पश्चिम बंगाल) स्थित नुमालीगढ़ रिफाइनरी लिमिटेड (NRL) के मार्केटिंग टर्मिनल को बांग्लादेश के दिनाजपुर जिले के पार्वतीपुर डिपो से जोड़ती है।
सटीक डेटा: 10 मार्च 2026 को दोपहर से शुरू हुई इस पंपिंग प्रक्रिया में लगभग 113 टन डीजल प्रति घंटे की रफ्तार से भेजा गया।
समय और लागत में बचत: पाइपलाइन के संचालन से पहले, डीजल का परिवहन रेल वैगनों के जरिए होता था, जो महंगा और धीमा था। पाइपलाइन ने इस प्रक्रिया को न केवल सस्ता बनाया है, बल्कि परिवहन समय में भी भारी कमी की है।
क्षमता: इस पाइपलाइन की वार्षिक क्षमता 10 लाख मीट्रिक टन (1 MMTPA) हाई-स्पीड डीजल परिवहन करने की है।
भारत की ‘नेबरहुड फर्स्ट’ नीति
विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम भारत की ‘नेबरहुड फर्स्ट’ नीति का एक मजबूत उदाहरण है। एक तरफ जहां भारत स्वयं अपनी घरेलू ईंधन उपलब्धता की कड़ी निगरानी कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ क्षेत्रीय सहयोग और ऊर्जा सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए पड़ोसी देश की सहायता करना दोनों देशों के बीच मजबूत द्विपक्षीय संबंधों को दर्शाता है।
बांग्लादेश पेट्रोलियम कॉरपोरेशन (BPC) के अधिकारियों ने पुष्टि की है कि यह खेप उनके देश के ईंधन भंडार को बनाए रखने में काफी मददगार साबित होगी। फिलहाल, अतिरिक्त डीजल आपूर्ति के बांग्लादेश के अनुरोध पर भी भारत सकारात्मक रूप से विचार कर रहा है।
इस घटनाक्रम से स्पष्ट है कि ऊर्जा सहयोग भारत और बांग्लादेश के संबंधों का एक आधार स्तंभ बन गया है, जो संकट के समय में भी दोनों देशों को करीब लाता है।