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ग्राम आलकन्हर व दनगढ़ में दो दिवसीय रामायण सम्मेलनों का भव्य समापन, देर रात तक क्षेत्र के दौरे पर रहीं जिला पंचायत अध्यक्ष नम्रता सिंह

मोहला ब्लॉक के ग्राम आलकन्हर एवं ग्राम दनगढ़ में आयोजित दो दिवसीय रामायण सम्मेलन श्रद्धा, भक्ति एवं सामाजिक समरसता के वातावरण में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। समापन अवसर पर जिला पंचायत अध्यक्ष एवं एकीकृत आदिवासी विकास परियोजना अध्यक्ष श्रीमती नम्रता सिंह जी मुख्य रूप से उपस्थित रहीं। कार्यक्रम के दौरान देर रात तक क्षेत्र के दौरे पर रहीं और ग्रामीणों से भेंट कर उनका हालचाल जाना।

अपने उद्बोधन में नम्रता सिंह जी ने कहा कि रामायण केवल धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि मानव जीवन को सत्य, धर्म, करुणा, त्याग और कर्तव्य के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देने वाला महान जीवन दर्शन है।

उन्होंने कहा कि मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम का आदर्श चरित्र आज भी समाज को एक सूत्र में बाँधने की शक्ति रखता है। ऐसे आयोजनों से संस्कारों का संरक्षण होता है और नई पीढ़ी को जीवन मूल्यों की सही दिशा मिलती है।

ग्राम आलकन्हर में आयोजित रामायण सम्मेलन में कमल तापड़िया जी (मंडल अध्यक्ष, गोटाटोला), राजू डोंगरे जी (महामंत्री, मंडल गोटाटोला), टेक राम भंडारी जी, बरन सुधाकर जी, जगदीश भूआर्य जी (ग्राम पटेल), चिन्तु राम तारम जी, खोराबाहरा राम भूआर्य जी, महेश तारम जी, गंगाराम कोरेटिया जी, रामनाथ भूआर्य जी सहित बड़ी संख्या में माताएं-बहनें एवं ग्रामवासी उपस्थित रहे।

वहीं ग्राम दनगढ़ में आयोजित सम्मेलन के समापन अवसर पर धर्मपाल अमिला जी, श्यामा बाई अमिला जी (सरपंच), संतोष मिश्रा जी, परदेशी राम भूआर्य जी, दामिनी भूआर्य जी (अध्यक्ष, किशोरी सनातन समिति), साधना अमिला जी (उपाध्यक्ष), चेतन साहू जी (ग्राम पटेल), डॉ. संजय वैरागढे जी, यशपाल साहू जी, अनूप साहू जी, कल्याण साहू जी सहित जनप्रतिनिधि, सामाजिक पदाधिकारी एवं बड़ी संख्या में ग्रामीणजन उपस्थित रहे।

कार्यक्रम के उपरांत जिला पंचायत अध्यक्ष नम्रता सिंह जी देर रात तक क्षेत्र के विभिन्न ग्रामों का दौरा कर ग्रामीणों से संवाद करती रहीं, उनकी समस्याएँ सुनीं तथा विकास एवं जनहित से जुड़े विषयों पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि जनसेवा केवल मंच तक सीमित नहीं, बल्कि गांव-गांव तक पहुँचकर लोगों से सीधा संवाद करना ही वास्तविक सेवा है।

नम्रता सिंह जी ने दोनों ग्रामों के आयोजकों एवं ग्रामीणजनों को सफल आयोजन के लिए बधाई देते हुए कहा कि रामायण जैसे आयोजनों से सामाजिक एकता, सांस्कृतिक चेतना और नैतिक मूल्यों को मजबूती मिलती है।

कार्यक्रम का समापन भक्ति, रामनाम और सामाजिक समरसता के संकल्प के साथ हुआ।

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