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स्वास्थ्य मंत्री की बड़ी घोषणा: अस्पतालों में खत्म होगा संलग्नीकरण का खेल, कर्मचारी संघ ने जताया आभार

रायपुर/बालोद:

छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य विभाग में लंबे समय से चले आ रहे ‘अटैचमेंट’ (संलग्नीकरण) के खेल पर अब लगाम लगने वाली है। विधानसभा में स्वास्थ्य मंत्री श्री श्याम बिहारी जायसवाल ने एक महत्वपूर्ण घोषणा करते हुए प्रदेश के सभी सरकारी अस्पतालों और स्वास्थ्य कार्यालयों में संलग्न अधिकारियों एवं कर्मचारियों का संलग्नीकरण समाप्त करने के निर्देश दिए हैं।

स्वास्थ्य व्यवस्था में सुधार की दिशा में बड़ा कदम

स्वास्थ्य मंत्री की इस घोषणा के तहत अब प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC), उप-स्वास्थ्य केंद्र (SHC), सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) और जिला अस्पतालों सहित सभी विभागीय कार्यालयों में अपनी मूल जगह छोड़कर दूसरी जगहों पर जमे कर्मचारी वापस अपनी पुरानी तैनाती पर लौटेंगे। मंत्री जी ने सदन में स्पष्ट किया कि इसके लिए विभागीय अधिकारियों को कड़े निर्देश जारी किए जा रहे हैं।

कर्मचारी संघ ने किया फैसले का स्वागत

स्वास्थ्य एवं बहुद्देशीय कर्मचारी संघ ने इस फैसले को स्वास्थ्य सेवाओं के हित में बताया है। संघ ने स्वास्थ्य मंत्री श्री श्याम बिहारी जायसवाल को इस साहसिक कदम के लिए धन्यवाद प्रेषित किया है।

स्वास्थ्य एवं बहुद्देशीय कर्मचारी संघ बालोद के जिलाध्यक्ष घनश्याम पुरी ने इस संबंध में विस्तार से जानकारी देते हुए कहा:

“माननीय स्वास्थ्य मंत्री जी की यह घोषणा स्वागत योग्य है। इससे उन क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार होगा जहाँ स्टाफ की कमी थी, क्योंकि कर्मचारी अन्य जगहों पर संलग्न होकर काम कर रहे थे।”

बालोद जिले का संदर्भ और अतीत का अनुभव

जिलाध्यक्ष घनश्याम पुरी ने याद दिलाया कि वर्ष 2019 में भी संघ के कड़े प्रयासों के बाद पूरे संभाग में अटैचमेंट समाप्त कराया गया था। उस समय तत्कालीन जॉइंट डायरेक्टर प्रभात पाण्डेय द्वारा आदेश जारी किए गए थे, जिसके बाद बालोद जिले के 65 कर्मचारियों का संलग्नीकरण समाप्त हुआ था।

हालांकि, समय बीतने के साथ यह प्रक्रिया फिर से शुरू हो गई और वर्तमान में भी जिले के कई अधिकारी-कर्मचारी अन्य कार्यालयों में संलग्न हैं। अब संघ और आम जनता की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि बालोद जिले में इस आदेश का क्रियान्वयन कितनी जल्दी होता है।

आम जनता को मिलेगा लाभ

विशेषज्ञों का मानना है कि संलग्नीकरण समाप्त होने से विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों के अस्पतालों में डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ की उपलब्धता बढ़ेगी। इससे मरीजों को इलाज के लिए भटकना नहीं पड़ेगा और स्वास्थ्य केंद्रों में रिक्त पदों की समस्या का भी समाधान होगा।

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