छत्तीसगढ़ का बस्तर अपनी प्राकृतिक सुंदरता के साथ-साथ अपनी अद्वितीय जनजातीय संस्कृति के लिए भी विश्व विख्यात हो रहा है। हाल ही में बस्तर के ग्राम धुड़मारास में एक अंतर्राष्ट्रीय अतिथि, विदेशी विशेषज्ञ सुश्री किर्सी ह्वैरीनेन (Kirsi Hyvaerinen) का आगमन हुआ, जहाँ स्थानीय ग्रामीणों ने उनका पारंपरिक और आत्मीय अभिनंदन किया।
पारंपरिक तरीके से हुआ ‘धुरवा’ स्वागत
जैसे ही सुश्री किर्सी धुड़मारास पहुँचीं, उनका स्वागत बस्तर की समृद्ध परंपराओं के साथ किया गया। उन्हें स्थानीय सिहाड़ी और महुए की माला पहनाई गई, जो यहाँ के पारिस्थितिक और सांस्कृतिक महत्व का प्रतीक है। इसके साथ ही, स्थानीय कलाकारों द्वारा प्रसिद्ध धुरवा नृत्य की प्रस्तुति दी गई, जिसकी लय और ताल ने विदेशी मेहमान को मंत्रमुग्ध कर दिया।
धुरवा डेरा’ होमस्टे और जैविक भोजन का अनुभव
अपनी यात्रा के दौरान, सुश्री किर्सी ने ‘धुरवा डेरा’ होमस्टे में समय बिताया। यहाँ उन्होंने बस्तर के पारंपरिक जैविक भोजन (Organic Food) का स्वाद चखा। बस्तर की सादगी और यहाँ की जीवनशैली ने उन्हें काफी प्रभावित किया। उन्होंने चित्रकोट जलप्रपात की भव्यता को भी देखा और उसे एक अद्भुत अनुभव बताया।
वैश्विक मंच पर बस्तर की विरासत
इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य बस्तर के ग्रामीण पर्यटन को बढ़ावा देना और इसे वैश्विक मानचित्र पर स्थापित करना है।
सांस्कृतिक विनिमय: विदेशी विशेषज्ञों के आने से स्थानीय युवाओं को नई दृष्टि मिलती है।
सतत पर्यटन: होमस्टे जैसी पहल से ग्रामीणों को सीधे रोजगार मिल रहा है।
प्राकृतिक संरक्षण: बस्तर की जैविक खेती और परंपराएं पर्यावरण के अनुकूल पर्यटन का उदाहरण पेश कर रही हैं।
“बस्तर की संस्कृति, यहाँ का आतिथ्य और परंपराएं वास्तव में अद्भुत हैं। यहाँ की विरासत में वैश्विक मंच पर चमकने की पूरी क्षमता है।”
अब यह स्पष्ट है कि बस्तर केवल अपनी नक्सली समस्याओं के लिए नहीं, बल्कि अपनी जीवंत संस्कृति और पर्यटन की असीम संभावनाओं के लिए दुनिया भर में पहचाना जाएगा।