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नवरात्रि की शक्ति: बालोद न्यायालय का ऐतिहासिक फैसला, पैतृक संपत्ति में बहनों को मिला उनका हक

(नवरात्रि में “आदि शक्ति” का उदय) पाररास (बालोद) की बहनों को न्याय, छोटेलाल साहू को 50-50 डिसमिल भूमि देने का आदेश नवरात्रि के पावन अवसर पर, जब पूरे देश में मां दुर्गा की आराधना की जा रही है, बालोद जिले के ग्राम पाररास से नारी शक्ति की एक प्रेरणादायक मिसाल सामने आई है। माननीय सिविल न्यायाधीश वर्ग-1 (CJ-1) श्री संजय सोनी ने पैतृक संपत्ति विवाद में वादी बहनों—तिजिया बाई एवं कमला बाई—के पक्ष में ऐतिहासिक फैसला सुनाया है।

न्यायालय ने अपने आदेश में प्रतिवादी छोटेलाल साहू को निर्देशित किया है कि वह पाररास, जिला बालोद स्थित वादग्रस्त भूमि में से अपने हिस्से से वादी बहनों को 50-50 डिसमिल भूमि प्रदान करें।

प्रकरण में सामने आया कि पाररास (बालोद) स्थित पैतृक भूमि को सौतेले भाइयों द्वारा बहनों की जानकारी के बिना ही आपस में बांटकर अपने नाम नामांतरण करा लिया गया था। यह कृत्य न केवल विधि के विरुद्ध था, बल्कि पारिवारिक विश्वास और सामाजिक मूल्यों के भी खिलाफ था।

महत्वपूर्ण तथ्य यह भी रहा कि पाररास की सामाजिक बैठक में स्वयं प्रतिवादीगण ने बहनों को उनका हिस्सा देने की बात स्वीकार की थी। यही सामाजिक स्वीकारोक्ति आगे चलकर बहनों के अधिकार की मजबूत नींव बनी, जिसे न्यायालय ने भी गंभीरता से लिया।

सुनवाई के दौरान प्रतिवादी मणि शंकर ने वाद प्रस्तुत होने के बाद ही वादीगण को 20-20 लाख रुपये चेक के माध्यम से भुगतान कर दिया, जिसे बहनों ने स्वीकार कर लिया।

वादी पक्ष की ओर से अधिवक्ता भेष कुमार साहू ने सशक्त एवं तार्किक पैरवी करते हुए बहनों के अधिकारों को प्रभावी ढंग से न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया, जिससे वादी पक्ष को सफलता मिली।

न्यायालय ने स्पष्ट किया कि पैतृक संपत्ति में पुत्रियों का भी समान अधिकार है और उन्हें किसी भी प्रकार से वंचित नहीं किया जा सकता।

नवरात्रि के इस शुभ समय में आया यह निर्णय समाज को एक सशक्त संदेश देता है—

“नारी ही आदि शक्ति है, और उसके अधिकारों का सम्मान ही सच्ची पूजा है।”

यह फैसला न केवल कानूनी दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि सामाजिक जागरूकता और नारी सम्मान की दिशा में भी एक मील का पत्थर साबित हो रहा है।

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