
बालोद
मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम के जन्मोत्सव राम नवमी महापर्व के पावन अवसर पर बालोद नगर के मरार पारा स्थित मोखाला मांझी मंदिर प्रांगण में संचालित सीता राम बाल संस्कार केंद्र में भक्ति, श्रद्धा और संस्कारों का अद्भुत संगम देखने को मिला। इस अवसर पर केंद्र के बच्चों, मंदिर समिति की मानस मंडली एवं मातृ शक्तियों ने मिलकर भव्य भजन-कीर्तन का आयोजन किया, जिससे पूरा वातावरण राममय हो गया।
कार्यक्रम की शुरुआत बच्चों द्वारा उत्साहपूर्वक भजन-संकीर्तन से हुई। नन्हे-मुन्ने बच्चों ने पूरे हर्ष और उल्लास के साथ भाग लेते हुए अपनी भक्ति भावनाओं को स्वर दिया। विशेष बात यह रही कि सभी बच्चे अपने-अपने घरों से थाली में दीपक सजाकर लेकर आए, जो उनकी श्रद्धा और संस्कारों का प्रतीक बना। इसके पश्चात सभी ने सामूहिक रूप से भगवान श्रीराम की आरती कर मंदिर प्रांगण में दीप प्रज्वलन किया और सुख-समृद्धि की मंगलकामनाएं कीं।
इस अवसर पर बाल संस्कार केंद्र की संचालिका एवं विश्व हिन्दू परिषद जिला बाल संस्कार केंद्र प्रमुख श्रीमती पूजा जैन जी ने बच्चों को राम नवमी के महत्व के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीराम सत्य, धर्म, त्याग और करुणा के सर्वोच्च आदर्श हैं। उनका जीवन हमें कठिन परिस्थितियों में भी धैर्य, मर्यादा और नैतिकता के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। उन्होंने बच्चों से आग्रह किया कि वे भगवान राम के आदर्शों को अपने जीवन में आत्मसात करें।
इसी क्रम में श्रीमती पूजा जैन जी ने हिन्दू नववर्ष के उपलक्ष्य में एक सराहनीय पहल करते हुए सनातन धर्म और संस्कृति की गरिमा को बढ़ावा देने का संदेश दिया। बालोद नगर के कपिलेश्वर मंदिर प्रांगण में आयोजित कन्या भोज कार्यक्रम में शामिल कन्याओं को उन्होंने भेंट स्वरूप भगवा ध्वज एवं आरती की पुस्तक प्रदान की। इस पहल के माध्यम से समाज में धार्मिक चेतना और संस्कारों के संरक्षण का प्रेरणादायक संदेश दिया गया।
कार्यक्रम के अंत में सभी उपस्थितजनों को प्रसाद वितरण किया गया। इस आयोजन में कलिन यादव, शशिकला शर्मा, चमेली दीदी, मंजू श्रीवास, सरोज श्रीवास, सोंकाली पटेल, पार्वती दीदी सहित अनेक मातृ शक्तियों की गरिमामयी उपस्थिति रही।
यह आयोजन न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक बना, बल्कि नई पीढ़ी को संस्कारों से जोड़ने की दिशा में एक सराहनीय प्रयास भी सिद्ध हुआ। बालोद नगर में इस तरह के आयोजन समाज में सकारात्मक ऊर्जा, एकता और सांस्कृतिक जागरूकता को सुदृढ़ करने का कार्य कर रहे हैं।
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