Home / योजना / कुर्सी से नहीं, जमीन पर उतरकर समझा बालोद… 16 माह में कलेक्टर दिव्या मिश्रा ने प्रशासन को बनाया अधिक सक्रिय और जनोन्मुख शिक्षा, स्वास्थ्य, स्वच्छता से लेकर विकास कार्यों और पर्यावरण,तक लगातार निगरानी सहज व्यवहार के साथ सख्त फैसलों ने बनाई अलग प्रशासनिक पहचान
कुर्सी से नहीं, जमीन पर उतरकर समझा बालोद… 16 माह में कलेक्टर दिव्या मिश्रा ने प्रशासन को बनाया अधिक सक्रिय और जनोन्मुख शिक्षा, स्वास्थ्य, स्वच्छता से लेकर विकास कार्यों और पर्यावरण,तक लगातार निगरानी सहज व्यवहार के साथ सख्त फैसलों ने बनाई अलग प्रशासनिक पहचान
बालोद। प्रशासनिक पद पर रहते हुए संवेदनशीलता, सहजता और दृढ़ इच्छाशक्ति के बीच संतुलन बनाना आसान नहीं होता। लेकिन बालोद जिले की कलेक्टर दिव्या उमेश मिश्रा ने अपने करीब 16 माह के कार्यकाल में अपनी कार्यशैली से इस संतुलन की अलग मिसाल पेश की है। 19 अप्रैल 2025 को बालोद कलेक्टर के रूप में पदभार संभालने के बाद से उन्होंने सुशासन, जनहित, शिक्षा, स्वास्थ्य, स्वच्छता और विकास कार्यों को अपनी प्राथमिकताओं में शामिल किया। आम लोगों की समस्याओं को संवेदनशीलता से सुनने के साथ ही अधिकारियों से समय-सीमा में काम कराने और योजनाओं के क्रियान्वयन में लापरवाही नहीं बरतने का संदेश उनकी कार्यशैली में लगातार दिखाई दिया।
सुशासन को बनाया प्रशासनिक कार्यशैली का आधार
कलेक्टर दिव्या उमेश मिश्रा ने शासन की योजनाओं को महज कागजी प्रक्रिया तक सीमित रखने के बजाय उनका वास्तविक लाभ पात्र हितग्राहियों तक पहुंचाने पर जोर दिया। सुशासन तिहार सहित विभिन्न अभियानों के दौरान उन्होंने विभागीय अधिकारियों के साथ नियमित समीक्षा कर लंबित प्रकरणों और जनसमस्याओं के निराकरण पर विशेष ध्यान दिया।
नियमित समीक्षा बैठकों के साथ मैदानी निरीक्षण को भी उन्होंने प्रशासनिक कार्यशैली का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया। अधिकारियों को योजनाओं की प्रगति की निरंतर निगरानी, निर्धारित समय-सीमा में कार्य पूर्ण करने और जनसमस्याओं के समाधान में संवेदनशीलता बरतने के निर्देश दिए गए। इससे प्रशासनिक मशीनरी में सक्रियता और जवाबदेही बढ़ाने की दिशा में प्रयास दिखाई दिए।
विकास कार्यों को गति, गुणवत्ता से समझौता नहीं
बालोद जिले में सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल, स्वच्छता, ग्रामीण विकास और अधोसंरचना से जुड़े विषय उनकी प्राथमिकताओं में लगातार रहे। विकास कार्यों की गुणवत्ता को लेकर उनका रुख स्पष्ट रहा है। निर्माण कार्यों में कमी अथवा गुणवत्ता संबंधी शिकायत सामने आने पर संबंधित अधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए गए।
ठोस अपशिष्ट प्रबंधन, ग्रामीण स्वच्छता और पेयजल जैसी मूलभूत सुविधाओं को मजबूत करने पर भी प्रशासन की ओर से विशेष जोर दिया गया। उनका प्रयास रहा कि सरकारी योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे और विकास कार्यों का वास्तविक असर गांवों और कस्बों में दिखाई दे।
शिक्षा व्यवस्था में सुधार पर विशेष फोकस
जिले की शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए भी लगातार समीक्षा की गई। विद्यालयों की स्थिति, शिक्षकों की उपलब्धता, परीक्षा परिणाम और शैक्षणिक गुणवत्ता जैसे विषयों पर प्राचार्यों एवं शिक्षकों के साथ बैठक कर सुधार के लिए कार्ययोजना तैयार करने पर जोर दिया गया।
बेहतर परीक्षा परिणाम के लिए पूरे शैक्षणिक सत्र में योजनाबद्ध तरीके से काम करने की आवश्यकता बताई गई। शिक्षकों की कमी वाले विद्यालयों में वैकल्पिक व्यवस्था के लिए प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश भी दिए गए। इससे शिक्षा व्यवस्था को केवल परीक्षा परिणाम तक सीमित न रखते हुए उसकी समग्र गुणवत्ता सुधारने की दिशा में प्रयास दिखाई दिए।
स्वास्थ्य सेवाओं की लगातार निगरानी
जनस्वास्थ्य के क्षेत्र में भी प्रशासन ने विभिन्न योजनाओं और अभियानों की समीक्षा को प्राथमिकता दी। मलेरिया नियंत्रण अभियान में जिले को सकारात्मक परिणाम मिले। जनवरी से जून 2026 के दौरान मलेरिया के मामलों में कमी दर्ज होना स्वास्थ्य विभाग की सक्रियता और जागरूकता अभियानों की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि रही।
इसके अलावा आयुष्मान कार्ड केवाईसी, स्वास्थ्य शिविरों और ग्रामीण क्षेत्रों तक स्वास्थ्य सुविधाओं की पहुंच जैसे विषयों पर भी लगातार निगरानी रखी गई। उद्देश्य यही रहा कि सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं का लाभ अधिक से अधिक पात्र लोगों तक पहुंच सके।
‘एक पेड़ महतारी के नाम’ बना जनभागीदारी का अभियान
पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में ‘एक पेड़ महतारी के नाम’ अभियान भी कलेक्टर के कार्यकाल की उल्लेखनीय पहलों में शामिल रहा। पौधरोपण को केवल सरकारी कार्यक्रम तक सीमित रखने के बजाय महिलाओं, जनप्रतिनिधियों, विद्यार्थियों, अधिकारियों और आम नागरिकों की भागीदारी से जोड़ने का प्रयास किया गया।
करीब ढाई लाख महिलाओं की भागीदारी के लक्ष्य के साथ चलाए गए इस अभियान में पौधरोपण के साथ पौधों की देखभाल और संरक्षण पर भी जोर दिया गया। इस पहल के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण को जनभागीदारी से जोड़कर व्यापक अभियान का स्वरूप देने की कोशिश की गई।
मैदानी निरीक्षण से बढ़ी जवाबदेही
कलेक्टर की कार्यशैली में मैदानी निरीक्षण का विशेष स्थान रहा। स्कूलों, स्वास्थ्य केंद्रों, पेयजल व्यवस्था, निर्माण कार्यों और सरकारी योजनाओं की जमीनी स्थिति जानने के लिए उन्होंने विभिन्न क्षेत्रों का निरीक्षण किया। मौके पर कमियां मिलने पर संबंधित अधिकारियों को आवश्यक सुधार के निर्देश दिए गए।
उनकी यह कार्यशैली इस बात को रेखांकित करती है कि प्रशासन केवल कार्यालयीन बैठकों तक सीमित न रहे, बल्कि वास्तविक स्थिति को मौके पर जाकर समझे और उसी के अनुरूप निर्णय ले।
शालीनता के साथ सख्त फैसले
कलेक्टर दिव्या उमेश मिश्रा की कार्यशैली की खास पहचान शालीनता और प्रशासनिक दृढ़ता का संयोजन रही है। आम नागरिकों से संवाद में सहजता और अधिकारियों के साथ समीक्षा के दौरान स्पष्टता उनके प्रशासनिक व्यक्तित्व के दो प्रमुख पहलू नजर आए।
जहां जरूरत महसूस हुई, वहां उन्होंने गुणवत्ता, नियमों और निर्धारित प्रक्रियाओं से समझौता नहीं करने का स्पष्ट संदेश दिया। यही वजह है कि उनकी कार्यशैली में संवेदनशीलता के साथ प्रशासनिक अनुशासन का संतुलन दिखाई देता है।
‘काम बोले’ की कार्यशैली
19 अप्रैल 2025 से अगस्त 2026 तक के सफर को देखें तो कलेक्टर दिव्या उमेश मिश्रा की कार्यशैली में एक बात स्पष्ट रूप से नजर आती है—प्रचार से अधिक काम और औपचारिकता से अधिक परिणाम।
ग्रामीण बहुल बालोद जिले में विकास की जरूरतें और चुनौतियां दोनों बड़ी हैं। ऐसे में सीमित संसाधनों के बीच विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय, योजनाओं की नियमित निगरानी और मैदानी स्तर पर उनकी वास्तविक स्थिति जानना प्रशासन के लिए महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।
कलेक्टर दिव्या ने प्रशासन को अधिक सक्रिय, जवाबदेह और जनोन्मुख बनाने की दिशा में लगातार प्रयास किया है। उनके अब तक के कार्यकाल की पहचान संवेदनशीलता, सहज संवाद, नियमित समीक्षा, मैदानी निगरानी और जरूरत पड़ने पर सख्त निर्णय लेने की क्षमता के रूप में उभरकर सामने आई है।
बालोद में प्रशासन की इस कार्यशैली का मूल संदेश साफ दिखाई देता है—जनहित सर्वोपरि, विकास प्राथमिकता और लापरवाही पर कोई समझौता नहीं।