जब तकनीक और इंसानी आंखें घने जंगलों की भूलभुलैया में हार मान जाती हैं, तब वहां प्रकृति की सबसे तेज नाक और वफादारी काम आती है। बिलासपुर पुलिस की जांबाज डॉग ‘विमला’ ने एक बार फिर यह साबित कर दिखाया है कि क्यों उन्हें पुलिस बल का ‘साइलेंट वॉरियर’ कहा जाता है।
करीब 48 घंटों से लापता एक युवक के लिए विमला मौत और जिंदगी के बीच की एकमात्र उम्मीद बनकर उभरी।
क्या थी पूरी घटना?
बिलासपुर जिले के अंतर्गत आने वाले घने वन क्षेत्र से तरुण सिदार नाम का युवक संदिग्ध परिस्थितियों में लापता हो गया था। परिजनों की चिंता समय के साथ बढ़ती जा रही थी, क्योंकि 48 घंटे बीत जाने के बाद भी तरुण का कोई सुराग नहीं मिला था। जंगल इतना घना और दुर्गम था कि तलाशी अभियान में जुटी पुलिस टीमों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा था।
विमला का ‘सुपरसोनिक’ रेस्क्यू ऑपरेशन
ऑपरेशन की कमान जब बिलासपुर पुलिस के डॉग स्क्वायड को सौंपी गई, तो ‘विमला’ ने मोर्चा संभाला।
10 किलोमीटर का सफर: विमला ने युवक की गंध (scent) पकड़ी और पथरीले रास्तों, कंटीली झाड़ियों और खतरनाक ढलानों की परवाह किए बिना करीब 10 किलोमीटर तक पुलिस टीम को लीड किया।
अचेत अवस्था में मिला युवक: लंबी खोजबीन के बाद, विमला ने घने जंगल के एक एकांत हिस्से में तरुण सिदार को खोज निकाला। तरुण उस वक्त अचेत (unconscious) अवस्था में था। अगर कुछ घंटे और बीत जाते, तो परिणाम घातक हो सकते थे।
खाकी के मौन योद्धाओं का सम्मान
बिलासपुर पुलिस ने सोशल मीडिया के माध्यम से विमला की इस वीरता को साझा करते हुए इसे अपनी ‘शानदार सफलता’ करार दिया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि विमला ने न केवल एक परिवार का सदस्य लौटाया है, बल्कि विभाग की प्रतिबद्धता को भी एक नई ऊंचाई दी है।
“जंगल की गहराई में हर गुजरता मिनट तरुण की जान के लिए खतरा था। विमला की सूझबूझ और अद्भुत सूंघने की क्षमता ने नामुमकिन को मुमकिन कर दिया।”
क्यों खास है यह मिशन?
यह मिशन इसलिए भी खास है क्योंकि जंगली इलाकों में गंध बहुत जल्दी मिट जाती है, लेकिन 48 घंटे बीत जाने के बावजूद विमला ने जिस सटीकता से युवक को ट्रैक किया, वह उसकी ट्रेनिंग और बुद्धिमत्ता का प्रमाण है।
आज पूरा बिलासपुर ‘विमला’ की बहादुरी को सलाम कर रहा है। यह घटना हमें याद दिलाती है कि सुरक्षा के घेरे में केवल वर्दीधारी इंसान ही नहीं, बल्कि उनके ये वफादार साथी भी बराबर के हकदार हैं।