छत्तीसगढ़ के वनांचल क्षेत्र नारायणपुर के बच्चों के लिए वह पल किसी सपने के सच होने जैसा था, जब उन्होंने न केवल आसमान की ऊंचाइयों को करीब से देखा, बल्कि विमान की बारीकियों को भी समझा। जिला प्रशासन की अनूठी पहल पर माँ दन्तेश्वरी हवाई अड्डा, जगदलपुर में नारायणपुर के 45 स्कूली विद्यार्थियों के लिए एक विशेष ‘विमानन आधारित शैक्षणिक भ्रमण’ (Aviation Educational Tour) आयोजित किया गया।
पहली बार दिखा ‘माइक्रोलाइट एयरक्राफ्ट’ का जादू
इस भ्रमण के दौरान बालक बुनियादी मिडिल स्कूल गरांजी और जवाहर नवोदय विद्यालय के छात्र-छात्राओं ने हिस्सा लिया। बच्चों ने पहली बार माइक्रोलाइट एयरक्राफ्ट को इतने करीब से देखा। विद्यार्थियों ने न केवल विमान के बाहर से दर्शन किए, बल्कि उन्हें कॉकपिट में बैठने का भी मौका मिला। कंट्रोल पैनल के बटनों और लीवर को देखकर बच्चों की आंखों में भविष्य का पायलट बनने की चमक साफ दिखाई दी।
विंग कमांडर विवेक कुमार साहू ने जगाया उत्साह
इस खास सत्र में विंग कमांडर विवेक कुमार साहू ने बच्चों के मार्गदर्शक की भूमिका निभाई। उन्होंने विद्यार्थियों को विमानन क्षेत्र (Aviation Sector) की तकनीकी जानकारियां दीं और बताया कि एक फाइटर पायलट बनने के लिए कौन-कौन से शैक्षणिक और शारीरिक मानदंडों (Standard) को पूरा करना जरूरी है।
एक छात्रा के सवाल ने खींचा सबका ध्यान:
भ्रमण के दौरान एक छात्रा ने जब फाइटर पायलट बनने की अपनी इच्छा जाहिर की और उससे जुड़े चुनौतीपूर्ण सवाल पूछे, तो विंग कमांडर भी प्रभावित हुए बिना नहीं रह सके। उन्होंने बच्चों को प्रेरित करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ के छोटे गांवों से निकलकर भी बच्चे देश की वायु सेना का हिस्सा बन सकते हैं।
प्रश्नोत्तरी और पुरस्कार: मेधावी छात्रों का सम्मान
तकनीकी अवलोकन के बाद एक रोचक क्विज (प्रश्नोत्तरी) प्रतियोगिता भी आयोजित की गई। विमान और उड़ान से जुड़े सवालों के सही जवाब देने वाले मेधावी छात्र-छात्राओं को पुरस्कृत किया गया, जिससे बच्चों का उत्साह दोगुना हो गया।
‘संवर रहा छत्तीसगढ़’ – जिला प्रशासन की सराहनीय पहल
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार और नारायणपुर जिला प्रशासन की इस पहल का उद्देश्य ग्रामीण और जनजातीय क्षेत्रों के बच्चों में विज्ञान और तकनीक के प्रति रुचि जगाना है। आमतौर पर किताबों तक सीमित रहने वाली शिक्षा को आज इन बच्चों ने धरातल (और आसमान) पर महसूस किया।
प्रमुख आकर्षण:
45 विद्यार्थियों का दल नारायणपुर से जगदलपुर पहुंचा।कॉकपिट का अनुभव: कंट्रोल पैनल को करीब से देखने और समझने का मौका।
करियर गाइडेंस: भारतीय वायु सेना में शामिल होने की विस्तृत जानकारी।
नवाचार: सामान्य स्कूली बच्चों के लिए राज्य में इस तरह का पहला बड़ा एक्सपोजर।
संपादन नोट: यह पहल दिखाती है कि अगर सही अवसर मिले, तो बस्तर और नारायणपुर के बच्चे भी आसमान की ऊंचाइयों को छूने का हौसला रखते हैं।