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भारत-UAE की ऐतिहासिक ऊर्जा डील: भारत में 30 मिलियन बैरल तक तेल भंडारण पर सहमति

नई दिल्ली/अबू धाबी:

भारत और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए रणनीतिक तेल भंडारण (Strategic Petroleum Reserve – SPR) और गैस सहयोग से जुड़े कई समझौतों पर सहमति जताई है। यह सहमति नरेंद्र मोदी की मई 2026 में यूएई यात्रा के दौरान बनी, जिसे भारत की दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा के लिए अहम माना जा रहा है।

समझौते के तहत, यूएई की सरकारी तेल कंपनी ADNOC ने भारत में 30 मिलियन बैरल तक अतिरिक्त कच्चे तेल के भंडारण की संभावनाओं पर सहयोग बढ़ाने की सहमति जताई है। विशेषज्ञों के अनुसार, यदि यह योजना पूरी तरह लागू होती है तो भारत की रणनीतिक तेल भंडारण क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है।

समझौते की प्रमुख बातें

1. रणनीतिक तेल भंडारण क्षमता बढ़ाने पर जोर

समझौते के अनुसार भारत में मौजूदा और प्रस्तावित रणनीतिक भंडारण केंद्रों में अतिरिक्त कच्चे तेल के भंडारण की संभावनाएं तलाशी जाएंगी। इससे वैश्विक आपूर्ति बाधित होने की स्थिति में ऊर्जा सुरक्षा को मजबूती मिल सकती है।

2. मौजूदा और प्रस्तावित स्टोरेज सुविधाओं का उपयोग

ऊर्जा सहयोग के तहत विशाखापट्टनम जैसे मौजूदा केंद्रों और चंडीखोल में प्रस्तावित परियोजनाओं को भी भविष्य की भंडारण रणनीति में शामिल किए जाने की संभावना है।

3. गैस भंडारण और LPG आपूर्ति सहयोग

तेल के अलावा दोनों देशों ने रणनीतिक गैस भंडारण (Strategic Gas Reserve) और दीर्घकालिक LPG आपूर्ति सहयोग को आगे बढ़ाने पर सहमति व्यक्त की है। इसके तहत Indian Oil Corporation (IOCL) और ADNOC के बीच लंबी अवधि के LPG सहयोग को महत्व दिया जा रहा है।

4. यूएई के फूजैरा पोर्ट में संभावित सहयोग

फूजैरा स्थित ऊर्जा अवसंरचना और तेल भंडारण सुविधाओं में भारत की संभावित भागीदारी पर भी चर्चा हुई है।

5. निवेश और आर्थिक सहयोग

ऊर्जा क्षेत्र के अलावा यूएई ने भारत के इंफ्रास्ट्रक्चर, बैंकिंग और वित्तीय क्षेत्रों में 5 अरब अमेरिकी डॉलर तक निवेश योजनाओं को लेकर भी रुचि दिखाई है।

 

हॉरमुज जलडमरूमध्य संकट के संदर्भ में क्यों अहम है यह सहयोग?

पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और हॉरमुज जलडमरूमध्य पर संभावित जोखिमों के बीच यह सहयोग भारत के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात के जरिए पूरा करता है, इसलिए रणनीतिक भंडारण क्षमता बढ़ना भविष्य में आपूर्ति बाधित होने की स्थिति में राहत दे सकता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के समझौते भारत को केवल ऊर्जा सुरक्षा ही नहीं, बल्कि वैश्विक ऊर्जा बाजार में अधिक रणनीतिक लचीलापन भी प्रदान कर सकते हैं।

इस दौरान नरेंद्र मोदी और शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान के बीच हुई वार्ता ने दोनों देशों की व्यापक रणनीतिक साझेदारी (Comprehensive Strategic Partnership) को और मजबूत करने की दिशा में संकेत दिए हैं।

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