बालोद-
जिले के बहुचर्चित प्रकरण में विशेष सत्र न्यायालय (POCSO) ने आरोपी गजेंद्र निषाद को समस्त आरोपों से बरी कर दिया। न्यायालय द्वारा दिए गए इस फैसले के बाद लंबे समय से चल रहा मामला निर्णायक मोड़ पर पहुँचा।
न्यायायल ने विस्तृत साक्ष्य परीक्षण के पश्चात निर्णय सुनाया गया, जिसमें अभियोजन पक्ष पीड़िता की आयु घटना के समय 18 वर्ष से कम होना संदेह से परे सिद्ध करने में असफल रहा। आरोपी पिछले लंबे समय लगभग 2 साल से न्यायिक अभिरक्षा में था और पूरे मामले की सुनवाई के दौरान कई महत्वपूर्ण पहलुओं पर न्यायालय ने गंभीरता से विचार किया। अंततः न्यायालय इस निष्कर्ष पर पहुँचा कि प्रस्तुत साक्ष्यों के आधार पर आरोप सिद्ध नहीं होते।
मामले में यह भी उल्लेखनीय रहा कि दोनों पक्षों के बीच पूर्व परिचय एवं संबंध की बात भी सामने आई, जिसे न्यायालय ने समग्र परिस्थितियों के साथ परखा।
आरोपी की ओर से अधिवक्ता भेष कुमार साहू ने प्रभावी और संतुलित पैरवी करते हुए न्यायालय के समक्ष तथ्यों को स्पष्ट रूप से प्रस्तुत किया। उनके तर्कों को न्यायालय ने गंभीरता से लिया, जिसके परिणामस्वरूप आरोपी को दोषमुक्त किया गया।
फैसले के बाद क्षेत्र में इस निर्णय को लेकर चर्चा का माहौल है और इसे न्यायिक प्रक्रिया में साक्ष्य के महत्व का उदाहरण माना जा रहा है।
—














