
बालोद।
“विवेक में ही धर्म बसा हुआ है। यदि आत्मा में विवेक नहीं जागा तो जन्म-जन्मांतर बिगड़ जाएंगे। विवेक के बिना मनुष्य जाने-अनजाने बड़ी गलतियां कर बैठता है, जिससे आगे चलकर भारी नुकसान उठाना पड़ता है।” उक्त विचार समता भवन बालोद में आयोजित प्रवचन श्रृंखला के दौरान पूज्य जैन संत श्री अक्षय मुनि जी मसा ने व्यक्त किए।
युवाओं को नशे के चंगुल से बचाना प्रत्येक भारतीय का नैतिक कर्तव्य
देश में बढ़ रही नशे की लत और विदेशी षड्यंत्रों पर चिंता व्यक्त करते हुए जैन संत ने कहा कि आज की युवा पीढ़ी नशे के जाल में फंसकर पंगु बनती जा रही है। भारत सरकार द्वारा चलाए जा रहे नशा मुक्ति अभियान में प्रजापिता ब्रह्माकुमारी संस्था जैसी सामाजिक संस्थाएं सराहनीय कार्य कर रही हैं। अब पूरे समाज और सामाजिक संगठनों को एकजुट होकर जागने की आवश्यकता है। प्रत्येक भारतीय का यह नैतिक कर्तव्य है कि वह युवाओं को इस चंगुल से बाहर निकालने में अपनी भूमिका निभाए।
आत्म-कल्याण ही जीवन का मुख्य लक्ष्य
जैन संत ने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि केवल औपचारिकताएं निभाने से व्यवहार चलता है, लेकिन जीवन का कल्याण नहीं होता। प्रतिदिन कम से कम एक से दो घंटे सत्संग और ध्यान के लिए निकालना अनिवार्य है। आज समाज का ध्यान केवल पैसों पर है, चेतना पर नहीं।
उन्होंने कर्म सिद्धांत पर जोर देते हुए कहा कि कर्म किसी को नहीं छोड़ता। निष्ठावान और कर्मठ कार्यकर्ता बनने से हर कठिन कार्य सरल हो जाता है। स्वतंत्रता संग्राम में गांधी, नेहरू, शास्त्री और सुभाष चंद्र बोस जैसे महापुरुषों के योगदान का स्मरण कराते हुए उन्होंने कहा कि हमें दूसरों को दोषी ठहराने के बजाय अपनी स्वयं की चेतना को जगाना होगा।
तपस्या और साधना में उमड़ा श्रद्धालुओं का उत्साह
जैन धर्म में जल के आधार पर उपवास और तपस्या का विशेष महत्व है। इस अवसर पर श्रद्धालुओं ने बढ़-चढ़कर तपस्या का संकल्प ग्रहण किया:
12 तपस्या: श्रीमती गुंजन ललवानी
11 तपस्या: निर्मल नाहटा
10 तपस्या: अनिकेत ललवानी
8 तपस्या: प्रिया सांखला, धर्मचंद टाटिया, कविता नाहर, इंदिरा बाफना, कंचन देवी श्रीश्रीमाल एवं सुनील ललवानी
7 तपस्या: नरेंद्र बाफना, मीनू बाफना, काजल नाहर एवं दिनेश श्रीश्रीमाल
6 तपस्या: देवीचंद चोपड़ा, सरिता नाहटा, शर्मिला बाफना, अजय सांखला, रचित नाहर एवं मौली राखेचा
5 तपस्या: रश्मि नाहटा
ध्यान प्रतियोगिता और अन्य आयोजन
ध्यान प्रतियोगिता: रविवार को आयोजित ध्यान प्रतियोगिता में 40 से अधिक महिलाओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
एकासना दिवस का आह्वान: पूज्य संत श्री अक्षय मुनि जी ने आगामी 6 अगस्त को ‘एकासना दिवस’ के रूप में मनाने का आह्वान किया है।
अतिथि आगमन: डोंगरगांव महिला मंडल ने बालोद पहुंचकर पूज्य संत के दर्शन-वंदन कर आशीर्वाद प्राप्त किया।
दीक्षा तिथि: श्रीमती ममता चोपड़ा ने पूज्या श्री यतनाश्रीजी मसा की दीक्षा के 4 वर्ष पूर्ण होने पर अपने भावपूर्ण विचार प्रस्तुत किए।
मंच संचालन: पूरी धर्मसभा का सफल संचालन श्रीमती वर्षा चौरड़िया द्वारा किया गया।
Related Posts
September 2, 2026
August 17, 2026
August 9, 2026