बालोद: दीपावली पर शहर को रोशन करने के लिए सजा पटाखा बाजार खुद आग के बड़े खतरे के साये में नजर आ रहा है। शहर के सरदार पटेल मैदान में 27 से अधिक अस्थायी पटाखा दुकानें संचालित हो रही हैं, लेकिन यहां सुरक्षा के बुनियादी मानकों की ही अनदेखी होती दिखाई दे रही है। दुकानों के बीच निर्धारित तीन मीटर की दूरी का पालन नहीं हो रहा है तो बांस और प्लास्टिक जैसी ज्वलनशील सामग्री से बने ढांचों में पटाखों की बिक्री की जा रही है। अग्निशमन उपकरणों की उपलब्धता, पानी के इंतजाम और पार्किंग व्यवस्था पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। हैरानी की बात यह है कि जिला अग्निशमन विभाग ने 2 नवंबर को पटाखा दुकानों की सुरक्षा के लिए विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए थे, लेकिन बाजार की जमीनी स्थिति इन आदेशों की प्रभावशीलता पर सवाल खड़े कर रही है। जब सुरक्षा के नियम पहले से तय हैं, तो फिर उनकी अनदेखी के बीच दुकानों का संचालन कैसे हो रहा है.? क्या प्रशासन किसी बड़े हादसे के बाद ही जागेगा.?
तीन मीटर की दूरी का नियम, मैदान में सटकर दुकानें-
जिला सेनानी एवं जिला अग्निशमन अधिकारी, नगर सेना बालोद द्वारा जारी दिशा-निर्देशों में स्पष्ट किया गया है कि पटाखा दुकानों का निर्माण कपड़े, बांस, रस्सी, टेंट अथवा अन्य ज्वलनशील सामग्री से नहीं किया जाना चाहिए। इसके बजाय अज्वलनशील सामग्री से बने टिन शेड में दुकानें लगाने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही दो दुकानों के बीच कम से कम तीन मीटर की दूरी रखना और दुकानों को आमने-सामने नहीं बनाना अनिवार्य किया गया है। इसके बावजूद सरदार पटेल मैदान में दुकानों की कतारें बेहद नजदीक नजर आ रही हैं। बांस और प्लास्टिक के ढांचों में पटाखों की बिक्री हो रही है। ऊपर की कपड़ो का शामियाना लगाया गया है। ऐसे में एक दुकान में आग लगने पर दूसरी दुकानों तक आग पहुंचने और पटाखों में विस्फोट होने का खतरा बढ़ सकता है।
अग्निशमन विभाग ने प्रत्येक दुकान में पांच किलोग्राम क्षमता का डीसीपी अग्निशामक यंत्र रखना अनिवार्य किया है। इसके अलावा दुकानों के सामने निर्धारित अंतराल पर 500 लीटर क्षमता के पानी से भरे ड्रम और बाल्टियां रखने के निर्देश भी दिए गए हैं। लेकिन मैदान में लगे पटाखा बाजार में उपलब्ध अग्निशमन संसाधनों की पर्याप्तता को लेकर सवाल उठ रहे हैं। कुछ दुकानों में छोड़कर अन्य दुकानों में अग्निशामक यंत्र ही नही रखा गया है। आपात स्थिति में इन संसाधनों का इस्तेमाल करने के लिए प्रशिक्षित कर्मचारी तैनात नही हैं। इन सवालों का जवाब संबंधित विभाग को देना होगा।
पार्किंग प्रतिबंधित, फिर दुकानों के सामने वाहनों की आवाजाही क्यों।?-
अग्निशमन विभाग ने पटाखा दुकानों के सामने बाइक और कार की पार्किंग प्रतिबंधित करने के निर्देश दिए हैं, ताकि आपात स्थिति में लोगों की निकासी और दमकल वाहनों की आवाजाही में बाधा न आए। लेकिन पटाखा बाजार के आसपास वाहनों की आवाजाही और पार्किंग को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। दीपावली के दौरान बाजार में भीड़ बढ़ने पर रास्ते अवरुद्ध हुए तो दमकल वाहन को घटनास्थल तक पहुंचाना मुश्किल हो सकता है। ऐसे में यातायात व्यवस्था और पार्किंग प्रतिबंध का पालन सुनिश्चित कराने की जिम्मेदारी किसकी है.?
आसपास मकान, सरकारी क्वार्टर और दुकानें, खतरे का दायरा बड़ा-
पटाखा बाजार की संवेदनशीलता इसलिए भी अधिक है, क्योंकि सरदार पटेल मैदान के आसपास निजी मकान, शासकीय क्वार्टर और फुटकर व थोक व्यापारियों की दुकानें मौजूद हैं। यह शहर का व्यस्त इलाका है, जहां दिनभर लोगों की आवाजाही बनी रहती है। अग्निशमन विभाग ने पटाखा दुकानों से 50 मीटर के दायरे में आतिशबाजी का प्रदर्शन प्रतिबंधित किया है। ट्रांसफार्मर के पास दुकानें नहीं लगाने, दुकानों के ऊपर से हाईटेंशन लाइन नहीं गुजरने देने और विद्युत कनेक्शन में फ्यूज अथवा सर्किट ब्रेकर लगाने के निर्देश भी दिए गए हैं। खुली बिजली बत्ती, तेल के दीपक और गैस लैंप के इस्तेमाल पर भी प्रतिबंध है। ऐसे संवेदनशील स्थान पर इन सभी मानकों का पालन सुनिश्चित करना जरूरी है, क्योंकि आगजनी की स्थिति में नुकसान केवल पटाखा दुकानों तक सीमित नहीं रहेगा।
पहले भी यातायात विभाग जता चुका है आपत्ति, फिर उसी मैदान में बाजार क्यों।?-
गौरतलब है कि सरदार पटेल मैदान में पटाखा दुकानों के संचालन को लेकर स्थानीय नागरिक पहले भी आपत्ति जता चुके हैं। पूर्व में बालोद यातायात विभाग ने मुख्य नगर पालिका अधिकारी को पत्र लिखकर इस स्थान पर पटाखा दुकानों का संचालन नहीं किए जाने के संबंध में ध्यान आकृष्ट कराया था। इसके बावजूद इस बार भी उसी स्थान पर बड़ी संख्या में अस्थायी दुकानें संचालित हो रही हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि पहले से आपत्ति होने के बावजूद पटाखा बाजार के लिए इसी स्थान का चयन किस आधार पर किया गया.? क्या दुकानें शुरू होने से पहले अग्निशमन विभाग, नगर पालिका और पुलिस की संयुक्त टीम ने निरीक्षण किया था.? यदि निरीक्षण हुआ तो सुरक्षा मानकों की अनदेखी पर कार्रवाई क्यों नहीं की गई.?
सिर्फ आदेश जारी करने से नहीं मिलेगी सुरक्षा, जमीन पर दिखानी होगी सख्ती-
पटाखों का कारोबार ज्वलनशील और विस्फोटक सामग्री से जुड़ा है। यहां सुरक्षा के प्रत्येक मानक का पालन अनिवार्य होना चाहिए। एक छोटी सी चिंगारी भी कई दुकानों को अपनी चपेट में ले सकती है। आसपास आवासीय भवन और व्यावसायिक प्रतिष्ठान होने से नुकसान का दायरा और भी बड़ा हो सकता है। ऐसे में जिला प्रशासन, नगर पालिका, पुलिस और अग्निशमन विभाग को तत्काल संयुक्त निरीक्षण कर प्रत्येक दुकान की सुरक्षा जांच करनी चाहिए। दुकानों के बीच निर्धारित दूरी, अग्निशमन उपकरण, पानी के ड्रम, विद्युत सुरक्षा और दमकल वाहनों के लिए रास्ता सुनिश्चित कराया जाना चाहिए। नियमों की अनदेखी करने वालों पर कार्रवाई भी जरूरी है। सवाल सीधा है कि जब हादसे से बचाव के लिए नियम पहले ही बनाए जा चुके हैं, तो फिर उनका पालन कराने में प्रशासन पीछे क्यों है.? त्योहार की खुशियां किसी प्रशासनिक लापरवाही की भेंट न चढ़ें, इसके लिए अब आदेशों से आगे बढ़कर जमीन पर कार्रवाई दिखानी होगी।
शहर के रिहायशी और व्यस्त इलाकों में भी स्थायी पटाखा दुकानों का संचालन, सुरक्षा पर सवाल-
सरदार पटेल मैदान में अस्थायी पटाखा दुकानों के संचालन के बीच बालोद शहर के अन्य रिहायशी और व्यस्त इलाकों में भी स्थायी पटाखा दुकानों का संचालन हो रहा है। बुधवारी बाजार, गंजपारा में अस्पताल के पास, रेलवे स्टेशन क्षेत्र और मरारपारा जैसे स्थानों पर पटाखों की दुकानें संचालित होने से सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। इन क्षेत्रों में आवासीय मकानों, व्यावसायिक प्रतिष्ठानों, अस्पताल और सार्वजनिक आवागमन वाले स्थानों की मौजूदगी के कारण आगजनी की स्थिति में खतरा और अधिक बढ़ सकता है। ऐसे में यह जांच का विषय है कि इन स्थायी दुकानों के पास वैध लाइसेंस और निर्धारित अनुमति है या नहीं तथा अग्निशमन विभाग द्वारा तय सुरक्षा मानकों का पालन किया जा रहा है या नहीं। जिला प्रशासन और अग्निशमन विभाग को इन सभी स्थानों का भी निरीक्षण कर यह सुनिश्चित करना चाहिए कि पटाखों के भंडारण और बिक्री के दौरान किसी तरह की सुरक्षा चूक न हो।
◆वर्ज़न
”पटाखा लाइसेंसो का नवीनीकरण किया गया है, नियमो का पालन करने निर्देश जारी किए गए है, जारी निर्देश के विपरीत अगर पटाखा दुकानों का संचालन किया रहा है तो एसडीएम एवं तहसीलदार को जांच कर कार्यवाही करने के निर्देश देता हूं, किसी और के लाइसेंस पर अगर पटाखा दुकान का संचालन किया जा रहा है, तो उसपर भी कार्यवाही की जाएगी।”
सुरेंद्र कुमार वैद्य, अपर कलेक्टर, बालोद
◆वर्ज़न
“एडवाइजरी जारी की गई है, उसका पालन करवाना एसडीएम का काम है। एडवाइजरी का पालन नही किया जा रहा होगा, तो पालिका और एसडीएम को चाहिए, की जारी एडवाइजरी का पालन सख्ती से करवाये, क्योकि सुरक्षा का सवाल है।” संजय मिश्रा, जिला सेनानी,