Home / राजनीति / 16 गांवों में निर्माण कार्यों के आवंटन पर उठे सवाल, जनप्रतिनिधियों को अंधेरे में रखने का आरोप, गुलशन चंद्राकर बोले- भ्रष्टाचार का गढ़ बन गया है विभाग-
बालोद: जिला पंचायत की सामान्य सभा में गुरुवार को आदिवासी विकास विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर जमकर बवाल हुआ। विशेष केंद्रीय सहायता मद से 16 गांवों में दो करोड़ रुपये से अधिक के विकास कार्यों की स्वीकृति और आवंटन का मामला सामने आते ही जनप्रतिनिधियों का गुस्सा फूट पड़ा। कार्यों की सूची और आवंटन की जानकारी जनप्रतिनिधियों से साझा नहीं करने पर जिला पंचायत अध्यक्ष, उपाध्यक्ष सहित सदस्यों ने आदिवासी विकास विभाग के सहायक आयुक्त को जमकर घेरा। सदस्यों ने विभाग पर मनमानी, अपारदर्शिता और चहेतों को उपकृत करने के गंभीर आरोप लगाते हुए तीखे सवाल दागे। बैठक में काफी देर तक अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के बीच तीखी बहस चलती रही। जिला पंचायत अध्यक्ष तारणी पुष्पेंद्र चंद्राकर, उपाध्यक्ष तोमन साहू, सांसद प्रतिनिधि पुष्पेंद्र चंद्राकर, जिला पंचायत सदस्य नीलिमा श्याम, गुलशन चंद्राकर, मिथलेश निरोटी और विधायक प्रतिनिधि पीयूष सोनी ने विभागीय कार्यप्रणाली पर कड़ा एतराज जताया। जनप्रतिनिधियों का कहना था कि आदिवासी विकास विभाग के माध्यम से करोड़ों रुपये के विकास कार्यों की स्वीकृति और आवंटन किया जा रहा है, लेकिन इसकी भनक तक जनप्रतिनिधियों को नहीं दी जा रही है। आखिर किन गांवों में कौन से काम स्वीकृत हुए, किसे काम दिया गया और आवंटन का आधार क्या रहा, इन सवालों का जवाब विभाग देने से बच रहा है। जिला पंचायत अध्यक्ष तारणी पुष्पेंद्र चंद्राकर, उपाध्यक्ष तोमन साहू, सांसद प्रतिनिधि पुष्पेंद्र चंद्राकर, जिला पंचायत सदस्य नीलिमा श्याम, गुलशन चंद्राकर, मिथलेश निरोटी और विधायक प्रतिनिधि पीयूष सोनी ने विभागीय कार्यप्रणाली पर कड़ा एतराज जताया। जनप्रतिनिधियों का कहना था कि आदिवासी विकास विभाग के माध्यम से करोड़ों रुपये के विकास कार्यों की स्वीकृति और आवंटन किया जा रहा है, लेकिन इसकी भनक तक जनप्रतिनिधियों को नहीं दी जा रही है। आखिर किन गांवों में कौन से काम स्वीकृत हुए, किसे काम दिया गया और आवंटन का आधार क्या रहा, इन सवालों का जवाब विभाग देने से बच रहा है।
16 गांवों में 2.04 करोड़ के काम, प्रत्येक निर्माण के लिए 12.77 लाख-
दरअसल, आदिवासी विकास विभाग की विशेष केंद्रीय सहायता मद से वित्तीय वर्ष 2025-26 में जिले के चार विकासखंडों के 16 गांवों में शासकीय उचित मूल्य की दुकान सह गोदाम निर्माण के लिए 2 करोड़ 4 लाख 32 हजार रुपये स्वीकृत किए गए हैं। प्रत्येक निर्माण कार्य के लिए 12.77 लाख रुपये का प्रावधान है। इसी स्वीकृति सूची और आवंटन की प्रक्रिया को लेकर जिला पंचायत की सामान्य सभा में विवाद खड़ा हुआ। जनप्रतिनिधियों का सवाल है कि इतनी बड़ी राशि के विकास कार्यों में उन्हें विश्वास में क्यों नहीं लिया गया और सूची की जानकारी तक क्यों छिपाई गई.?
किसानों के मुआवजे से लेकर अवैध शराब तक उठाए सवाल-
सामान्य सभा में गुलशन चंद्राकर ने अर्नब तूफान से प्रभावित किसानों को शीघ्र मुआवजा देने का मुद्दा उठाया। उन्होंने धान खरीदी की तैयारियों को दुरुस्त रखने और खरीदी केंद्रों में किसानों को अनावश्यक परेशान नहीं करने की मांग की। उन्होंने स्पष्ट कहा कि किसान के धान की ढेरी लगाने के बाद उससे किसी तरह का अतिरिक्त काम नहीं कराया जाना चाहिए। इसके अलावा अर्जुन्दा में स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही से मरीज की मौत के मामले में जिम्मेदारों पर कार्रवाई की मांग की। क्षेत्र में अवैध शराब बिक्री और चखना दुकानों से फैल रही गंदगी पर नाराजगी जताते हुए संबंधित दुकानों के टेंडर निरस्त करने की बात कही। उन्होंने छात्रावास में आदिवासी बालक की मौत का मामला भी उठाया और विभागीय जवाबदेही तय करने की मांग की। बैठक में जिला पंचायत सीईओ सुनील चंद्रवंशी सहित विभिन्न सभापति, जिला पंचायत सदस्य, जनप्रतिनिधि और विभागीय अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित रहे।