Home / शिक्षा विभाग / दुर्ग, धमतरी और बिलासपुर की तर्ज पर बालोद में भी हो केवल 2 घंटे कार्य; स्कूल सफाई कर्मचारियों ने अतिरिक्त कार्य के लंबित भुगतान को लेकर कलेक्टर व DEO को सौंपा ज्ञापन
दुर्ग, धमतरी और बिलासपुर की तर्ज पर बालोद में भी हो केवल 2 घंटे कार्य; स्कूल सफाई कर्मचारियों ने अतिरिक्त कार्य के लंबित भुगतान को लेकर कलेक्टर व DEO को सौंपा ज्ञापन
छत्तीसगढ़ अंशकालीन स्कूल सफाई कर्मचारी कल्याण संघ ने जिला प्रशासन के समक्ष अपनी मांगों को लेकर मोर्चा खोल दिया है। दुर्ग, धमतरी और बिलासपुर जिलों में लागू व्यवस्था की तर्ज पर बालोद जिले में भी स्कूल सफाई कर्मचारियों से केवल सुबह 2 घंटे कार्य कराने और वर्ष 2013 से अब तक कराए गए अतिरिक्त कार्य के लंबित मानदेय भुगतान की मांग को लेकर संगठन द्वारा कलेक्टर, जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) तथा विकासखंड शिक्षा अधिकारी (BEO) को एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा गया है। यह कदम शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय बेलमांड में कार्यरत सफाई कर्मचारी गंभीर साहू की पुनः नियुक्ति और उनके अधिकारों की रक्षा के संदर्भ में उठाया गया है।
संघ के पदाधिकारियों ने सौंपे गए ज्ञापन में स्पष्ट किया है कि गंभीर साहू वर्ष 2011 से लगातार विद्यालय में बेहद अल्प मानदेय पर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। शासन के स्पष्ट निर्देश हैं कि अंशकालीन स्कूल सफाई कर्मचारियों से प्रतिदिन केवल 2 घंटे ही कार्य लिया जाए और उसी के अनुरूप उन्हें मानदेय का भुगतान किया जाता है। परंतु बालोद जिले में प्रशासनिक विसंगतियों के कारण कर्मचारियों का लगातार शोषण हो रहा है, जिससे उनके समक्ष आर्थिक संकट खड़ा हो गया है।
वर्ष 2013 के दोहरे आदेश से फंसा पेच, 2 घंटे का भुगतान अब तक बकाया
ज्ञापन के माध्यम से संघ ने गंभीर आरोप लगाते हुए बताया कि वर्ष 2013 में तत्कालीन जिला शिक्षा अधिकारी एवं विकासखंड शिक्षा अधिकारी बालोद द्वारा एक आदेश जारी किया गया था। इस आदेश के तहत सफाई कर्मचारियों से सुबह 2 घंटा और शाम को 2 घंटा, यानी कुल 4 घंटे कार्य लेने का नियम बनाया गया। कर्मचारियों ने आदेश का पालन करते हुए निष्ठापूर्वक कार्य किया, लेकिन जब भुगतान की बात आई तो उन्हें केवल 2 घंटे की मजदूरी ही दी गई। शेष 2 घंटे का अतिरिक्त कार्य भुगतान पिछले 13 वर्षों से लंबित है, जिसे लेकर कर्मचारियों में भारी आक्रोश है।
छत्तीसगढ़ के अन्य प्रमुख जिलों जैसे दुर्ग, धमतरी और बिलासपुर में स्कूल सफाई कर्मचारियों के लिए कार्यवधि केवल सुबह 2 घंटे निर्धारित है। इसके विपरीत, बालोद जिले में प्राचार्यों द्वारा शाम को दोबारा स्कूल का ताला बंद कराने और सफाई के लिए दबाव बनाया जाता है, जिससे कर्मचारी दूसरा कोई रोजगार करने से वंचित रह जाते हैं।
कर्मचारियों का कहना है कि बेहद कम मानदेय होने के कारण उन्हें अपने परिवार का भरण-पोषण करने के लिए अन्य स्थानों पर मजदूरी या अन्य कार्य करना पड़ता है। परंतु प्राचार्यों द्वारा शाम को भी कार्य पर आने के लिए बाध्य किए जाने के कारण वे दूसरा काम नहीं कर पाते। इससे उनकी रोजी-रोटी प्रभावित हो रही है और वे अपने बच्चों की शिक्षा तथा परिवार की बुनियादी जरूरतों को पूरा करने में असमर्थ साबित हो रहे हैं। ज्ञापन सौंपने के दौरान जिला मीडिया प्रभारी रुपेश कुमार सोनकर, ब्लॉक अध्यक्ष राकेश कुमार कलिहारी, संतोष साहू, गंभीर साहू सहित भारी संख्या में संगठन के कर्मचारी उपस्थित थे।
पदाधिकारियों एवं कर्मचारियों के मुख्य वक्तव्य:
राकेश कलिहारी (ब्लॉक अध्यक्ष, छत्तीसगढ़ अंशकालीन स्कूल सफाई कर्मचारी कल्याण संघ):
“जब तक हमारे कर्मचारियों को उनके द्वारा किए गए अतिरिक्त 2 घंटे के कार्य का पूरा भुगतान नहीं मिल जाता, तब तक संगठन में आक्रोश बना रहेगा। अगर उच्च अधिकारियों द्वारा हमारी इन जायज मांगों पर जल्द से जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया और लंबित भुगतान नहीं किया गया, तो संगठन आगे चलकर उग्र आंदोलन करने के लिए विवश होगा।”
गंभीर साहू (पीड़ित सफाई कर्मचारी, बेलमांड):
“विद्यालयों के प्राचार्य अपनी नौकरी और जिम्मेदारी बचाने के लिए शाला विकास समिति को बीच में ले आते हैं और हमसे तय समय से अधिक कार्य करने का अनुचित दबाव बनाते हैं। इस दोहरे दबाव के कारण हम कहीं और रोजगार नहीं तलाश पाते। इतने अल्प मानदेय में आज के समय में परिवार चलाना असंभव हो चुका है।”
संतोष साहू (कर्मचारी प्रतिनिधि):
“वर्तमान में मिल रहा मानदेय ऊंट के मुंह में जीरे के समान है। हमारी प्रशासन से केवल इतनी गुहार है कि कार्य की अवधि केवल सुबह 2 घंटे ही रखी जाए, ताकि हम दिन के बचे हुए समय में कोई दूसरा छोटा-मोटा काम करके अपने परिवार की आर्थिक स्थिति को संभाल सकें और सम्मानपूर्वक जीवन जी सकें।