बालोद। भारतीय जनता युवा मोर्चा (भाजयुमो) में वर्षों से संगठन को मजबूत करने, युवाओं को जोड़ने और पार्टी की विचारधारा को जन-जन तक पहुंचाने वाले कार्यकर्ताओं का योगदान हमेशा महत्वपूर्ण माना जाता है। इसी क्रम में आदित्य पिपरे और संजय साहू ने संगठन में विभिन्न महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों का सफलतापूर्वक निर्वहन करते हुए अपनी अलग पहचान बनाई है।
आदित्य पिपरे ने अपने संगठनात्मक जीवन की शुरुआत भारतीय जनता युवा मोर्चा में एक सक्रिय कार्यकर्ता के रूप में की। उनकी कार्यशैली, अनुशासन और संगठन के प्रति समर्पण को देखते हुए उन्हें पहले युवा मोर्चा जिला मंत्री की जिम्मेदारी सौंपी गई। इसके बाद उन्होंने भाजयुमो जिलाध्यक्ष के रूप में संगठन को नई दिशा देने का कार्य किया। वर्तमान में वे प्रदेश प्रशिक्षण प्रमुख के साथ-साथ कोंडागांव जिला प्रभारी की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभा रहे हैं। उनके नेतृत्व में प्रशिक्षण शिविरों, संगठन विस्तार अभियानों और युवा संपर्क कार्यक्रमों को नई गति मिली है।
वहीं संजय साहू का संगठनात्मक सफर भी संघर्ष, समर्पण और निरंतर सक्रियता का उदाहरण रहा है। उन्होंने युवा मोर्चा ग्रामीण मंडल कार्यकारिणी सदस्य के रूप में अपनी जिम्मेदारी का निर्वहन करते हुए संगठन में सक्रिय भूमिका निभाई। इसके बाद उन्हें भाजयुमो ग्रामीण मंडल महामंत्री बनाया गया। संगठन के प्रति उनकी मेहनत और कार्यकुशलता को देखते हुए उन्हें युवा मोर्चा जिला उपाध्यक्ष का दायित्व सौंपा गया। वर्तमान में वे प्रदेश प्रशिक्षण सह प्रमुख तथा सुकमा जिला सह प्रभारी के रूप में संगठन को मजबूती प्रदान कर रहे हैं।
दोनों नेताओं ने अपने-अपने दायित्वों का निर्वहन करते हुए संगठन के विस्तार, बूथ स्तर तक कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने, युवाओं को राष्ट्र निर्माण की मुख्यधारा से जोड़ने तथा पार्टी की नीतियों को आमजन तक पहुंचाने में उल्लेखनीय योगदान दिया है। प्रशिक्षण कार्यक्रमों, सदस्यता अभियान, युवा सम्मेलन, सेवा कार्यों और जनसंपर्क अभियानों में उनकी सक्रिय भागीदारी लगातार देखने को मिलती रही है।
राजनीतिक और सामाजिक क्षेत्र में उनकी सक्रियता ने अनेक युवा कार्यकर्ताओं को संगठन से जुड़ने के लिए प्रेरित किया है। संगठन के वरिष्ठ नेताओं का भी मानना है कि आदित्य पिपरे और संजय साहू जैसे समर्पित कार्यकर्ताओं की मेहनत और संगठनात्मक क्षमता भारतीय जनता युवा मोर्चा को निरंतर मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
भाजयुमो कार्यकर्ताओं का कहना है कि संगठन में जिम्मेदारियां केवल पद नहीं होतीं, बल्कि सेवा, अनुशासन और समर्पण का माध्यम होती हैं। आदित्य पिपरे और संजय साहू ने अपने कार्यों के माध्यम से इस बात को सिद्ध किया है कि निरंतर मेहनत, ईमानदारी और संगठन के प्रति निष्ठा के बल पर हर कार्यकर्ता नई ऊंचाइयों तक पहुंच सकता है। यही कारण है कि दोनों युवा नेताओं का संगठनात्मक सफर आज अनेक युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गया है।