Home / रायपुर / हिंसा छोड़ अब विकास की उड़ान: सुकमा की पुनर्वासित (आत्मसमर्पित) बेटियों ने राष्ट्रीय हथकरघा दिवस पर जीता दिल जिसे देख मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय भी फेसबुक में पोस्ट करने से खुद को नहीं रोक पाए
हिंसा छोड़ अब विकास की उड़ान: सुकमा की पुनर्वासित (आत्मसमर्पित) बेटियों ने राष्ट्रीय हथकरघा दिवस पर जीता दिल जिसे देख मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय भी फेसबुक में पोस्ट करने से खुद को नहीं रोक पाए
रायपुर। छत्तीसगढ़ में सुशासन, पुनर्वास और आत्मनिर्भरता की दिशा में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक क्षण उस समय देखने को मिला, जब राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के अवसर पर आयोजित प्रदेश स्तरीय बुनकर सम्मेलन एवं ग्रामोद्योग विभाग की स्वदेशी प्रदर्शनी में सुकमा जिले के अतिसंवेदनशील चिंतलनार क्षेत्र की पुनर्वासित (आत्मसमर्पित) बेटियों ने राजधानी रायपुर के भव्य मंच पर अपनी प्रतिभा का शानदार प्रदर्शन किया। छत्तीसगढ़ के इतिहास में यह पहली बार हुआ, जब ग्रामोद्योग विभाग की पहल पर इन पुनर्वासित बेटियों ने राज्य स्तरीय फैशन शो में पारंपरिक हथकरघा परिधानों के साथ रैंप वॉक कर पूरे प्रदेश को एक सशक्त संदेश दिया कि हिंसा का रास्ता छोड़कर विकास, आत्मसम्मान और सम्मानजनक जीवन की ओर बढ़ना ही नई दिशा है।
कार्यक्रम रायपुर स्थित पंडित दीनदयाल उपाध्याय ऑडिटोरियम में आयोजित किया गया, जहाँ प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय, विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह, ग्रामोद्योग मंत्री श्री गजेन्द्र यादव, वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री श्री लखन लाल देवांगन सहित अनेक जनप्रतिनिधि, अधिकारी, बुनकर और विभिन्न जिलों से आए प्रतिभागी उपस्थित रहे।
₹10.90 करोड़ से अधिक की सहायता, बुनकरों को मिला सम्मान
राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के अवसर पर आयोजित प्रदेश स्तरीय बुनकर सम्मेलन में राज्य सरकार ने हथकरघा एवं ग्रामोद्योग से जुड़े पात्र बुनकर परिवारों को विभिन्न योजनाओं के अंतर्गत ₹10.90 करोड़ से अधिक की सहायता राशि प्रदान की। कार्यक्रम में प्रदेश के उत्कृष्ट एवं सर्वाधिक उत्पादन करने वाले बुनकरों को “वरिष्ठ बुनकर सम्मान” से सम्मानित किया गया। साथ ही छत्तीसगढ़ के हथकरघा उत्पादों को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने के उद्देश्य से नए ब्रांड “कोशल फेब” तथा “बिलासा” के लोगो का भी भव्य शुभारंभ किया गया।
जब रैंप पर उतरीं चिंतलनार की बेटियाँ, भावुक हो उठा पूरा सभागार
कार्यक्रम का सबसे प्रेरणादायी और भावनात्मक क्षण तब आया, जब सुकमा के चिंतलनार क्षेत्र की पुनर्वासित (आत्मसमर्पित) बेटियों ने मिस इंडिया ईस्ट सुश्री अनुष्का सोन के साथ छत्तीसगढ़ के पारंपरिक हथकरघा परिधानों में आत्मविश्वास से भरपूर रैंप वॉक किया।
रैंप पर कदम रखते हुए इन बेटियों ने केवल वस्त्रों का प्रदर्शन नहीं किया, बल्कि अपने जीवन में आए परिवर्तन, आत्मविश्वास, पुनर्वास और सम्मानजनक भविष्य की नई कहानी पूरे प्रदेश के सामने प्रस्तुत कर दी। तालियों की गूंज से पूरा सभागार गदगद हो उठा और उपस्थित सभी अतिथि इस ऐतिहासिक पल के साक्षी बने।
फैशन शो में शामिल पुनर्वासित बेटियों में श्रीमती पुनेम देवे, श्रीमती माड़वी देवे, श्रीमती माड़वी माल्ले, श्रीमती मिडियम गांगी, कुमारी माड़वी नान्दनी, कुमारी डोंडी रामे, कुमारी माड़काम भीमे, कुमारी पोड़ियाम राजे, कुमारी पुनेम ज्योति तथा कुमारी हिड़मे मारकाम ने अपनी गरिमामयी प्रस्तुति से सभी का मन मोह लिया।
हिंसा से विश्वास और विकास की ओर बढ़ते नए छत्तीसगढ़ की तस्वीर
यह फैशन शो केवल एक सांस्कृतिक प्रस्तुति नहीं था, बल्कि यह उस परिवर्तन का जीवंत उदाहरण था, जिसमें कभी हिंसा और भय के वातावरण में जीवन व्यतीत करने वाली बेटियाँ आज मुख्यधारा से जुड़कर सम्मानपूर्वक समाज के सामने अपनी पहचान बना रही हैं।
ग्रामोद्योग विभाग की इस अनूठी पहल ने यह संदेश दिया कि यदि सही अवसर, प्रशिक्षण और मार्गदर्शन मिले तो पुनर्वासित युवा एवं महिलाएँ समाज की मुख्यधारा में लौटकर आत्मनिर्भर और सम्मानजनक जीवन जी सकती हैं। यह कार्यक्रम वास्तव में “हिंसा से विकास, भय से विश्वास और भटके हुए जीवन से सम्मानजनक भविष्य” की ओर बढ़ते नए छत्तीसगढ़ का सशक्त प्रतीक बन गया।
मुख्यमंत्री और विधानसभा अध्यक्ष ने बढ़ाया हौसला
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय एवं विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह स्वयं मंच पर पहुंचे और पुनर्वासित बेटियों से मुलाकात कर उनका उत्साहवर्धन किया। उन्होंने ग्रामोद्योग विभाग की इस अभिनव पहल की मुक्तकंठ से सराहना करते हुए कहा कि यह प्रयास प्रदेश में शांति, पुनर्वास और आत्मनिर्भरता की दिशा में एक प्रेरणादायी उदाहरण है।
मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय इस भावनात्मक पल से इतने प्रभावित हुए कि उन्होंने स्वयं अपने आधिकारिक फेसबुक पेज पर इस प्रेरक पहल का उल्लेख करते हुए पुनर्वासित बेटियों के आत्मविश्वास, साहस और नई शुरुआत की सराहना की। इससे यह स्पष्ट हुआ कि राज्य सरकार पुनर्वास और विकास के माध्यम से बस्तर सहित पूरे छत्तीसगढ़ में सकारात्मक परिवर्तन की दिशा में गंभीरता से कार्य कर रही है।
ग्रामोद्योग विभाग की पहल बनी प्रेरणा
ग्रामोद्योग विभाग की इस पहल को प्रदेशभर में सराहना मिल रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के प्रयास न केवल पारंपरिक हथकरघा उद्योग को नई पहचान देंगे, बल्कि पुनर्वासित परिवारों के सामाजिक और आर्थिक सशक्तिकरण का भी मजबूत माध्यम बनेंगे। चिंतलनार जैसी संवेदनशील भूमि से निकलकर राजधानी के प्रतिष्ठित मंच तक पहुँचना इन बेटियों के जीवन में आए परिवर्तन की एक नई कहानी है, जो आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बनेगी।
अनेक गणमान्य अतिथियों की रही उपस्थिति
इस अवसर पर हाथकरघा संघ के अध्यक्ष श्री भोजराम देवांगन, खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड के अध्यक्ष श्री राकेश पांडेय, ग्रामोद्योग विभाग के सचिव श्री राजेश सिंह राणा सहित विभागीय अधिकारी, जनप्रतिनिधि, बुनकर, शिल्पकार एवं बड़ी संख्या में आमजन उपस्थित रहे। सभी ने इस पहल की सराहना करते हुए इसे नए छत्तीसगढ़ की सकारात्मक सोच और विकास यात्रा का प्रेरणादायी अध्याय बताया।