छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद के खात्मे और बस्तर में शांति बहाली की दिशा में आज एक ऐतिहासिक दृश्य देखने को मिला। राज्य सरकार की पुनर्वास नीति से प्रभावित होकर मुख्यधारा में लौटे आत्मसमर्पित नक्सलियों (पूर्व कैडरों) के एक दल ने आज छत्तीसगढ़ विधानसभा की कार्यवाही देखी।
यह पहला अवसर है जब कभी बंदूक थामने वाले इन युवाओं ने सदन की दीर्घा (Visitor’s Gallery) में बैठकर उस लोकतांत्रिक प्रक्रिया को करीब से देखा, जहाँ प्रदेश के विकास की नीतियां बनाई जाती हैं।
उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा की पहल
प्रदेश के उपमुख्यमंत्री और गृहमंत्री विजय शर्मा ने इस अवसर पर इन युवाओं का स्वागत किया। उन्होंने सोशल मीडिया और सदन के माध्यम से संदेश दिया कि “लोकतंत्र में ही सबका हित सुरक्षित है।” उन्होंने बताया कि सरकार की ‘नयंद नेल्लानार’ (आपका अच्छा गांव) योजना के तहत अब अंदरूनी गांवों तक विकास पहुँच रहा है, जिससे नक्सली विचारधारा कमजोर पड़ रही है।
लेख की मुख्य बातें:
लोकतंत्र का अनुभव: आत्मसमर्पित नक्सलियों ने सदन में चल रही चर्चा और प्रश्नकाल की कार्यवाही को प्रत्यक्ष रूप से देखा।
बदलता बस्तर: गृहमंत्री ने स्पष्ट किया कि जो भी नक्सली हिंसा का रास्ता छोड़ना चाहते हैं, सरकार उनके पुनर्वास और सुरक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
संवाद की अपील: हाल ही में BBM (बरगढ़-बलांगीर-महासमुंद) डिवीजन के नक्सलियों ने भी पत्र लिखकर मुख्यधारा में आने की इच्छा जताई थी, जिस पर सरकार ने सकारात्मक रुख अपनाया है।
लक्ष्य 2026: सरकार ने मार्च 2026 तक छत्तीसगढ़ को नक्सल मुक्त बनाने का संकल्प दोहराया है।
पुनर्वास नीति का असर
विधानसभा में पेश किए गए आंकड़ों के अनुसार, पिछले कुछ महीनों में आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों की संख्या में भारी बढ़ोतरी हुई है। सरकार इन युवाओं को:
रहने के लिए पक्का आवास।
बेहतर शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाएं।
स्वरोजगार के लिए कौशल प्रशिक्षण (Skill Training) प्रदान कर रही है।
“गोली और बारूद से किसी का भला नहीं हुआ। आज इन युवाओं ने देखा कि कैसे संवाद और चर्चा के जरिए समस्याओं का समाधान निकाला जाता है। यह बस्तर के बदलते भविष्य की तस्वीर है।”——–विजय शर्मा, उपमुख्यमंत्री, छत्तीसगढ़