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बस्तर के युवाओं और महिलाओं को मिलेगा रोजगार: केंद्रीय वस्त्र मंत्री ने रायपुर बैठक में दिए बड़े निर्देश, हर उद्यमी की आय ₹5 लाख करने का लक्ष्य

​रायपुर, 12 जून 2026

छत्तीसगढ़ के ग्रामीण और कुटीर उद्योग को वैश्विक मंच पर लाने और स्थानीय हुनर को मोटी कमाई से जोड़ने के लिए केंद्र और राज्य सरकार ने एक बड़ी कार्ययोजना तैयार कर ली है। इसी कड़ी में बस्तर के महिलाओं और युवाओं को सीधे रोजगार से जोड़ने के लिए ग्रामोद्योग विभाग के एक विशेष प्रोजेक्ट को मंजूरी दे दी गई है।

​यह महत्वपूर्ण निर्णय केंद्रीय वस्त्र मंत्री श्री गिरिराज सिंह की अध्यक्षता में रायपुर के राज्य अतिथि गृह (पहुना) में आयोजित एक हाई-लेवल समीक्षा बैठक में लिया गया। बैठक में रेशम उत्पादन, खादी, हथकरघा और हस्तशिल्प क्षेत्र के समग्र विकास पर विशेष बल दिया गया।

​📈 मुख्य लक्ष्य: हर उद्यमी की सालाना आय हो ₹5 लाख

​केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने विभागीय अधिकारियों को एक बेहद महत्वाकांक्षी लक्ष्य सौंपा है। उन्होंने निर्देशित किया कि सरकारी योजनाओं को इस तरह धरातल पर उतारा जाए जिससे ग्रामीण और कुटीर उद्योग से जुड़े हर उद्यमी, बुनकर और शिल्पी की न्यूनतम वार्षिक आय ₹5 लाख तक पहुंच सके।

​बस्तर के युवाओं और महिलाओं के लिए मंजूर किया गया नया प्रोजेक्ट इसी लक्ष्य को पूरा करने में मील का पत्थर साबित होगा, जिससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के बड़े अवसर पैदा होंगे।

​💡 नवाचार और आधुनिकता: ‘निफ्ट’ (NIFT) और एक्सपोर्ट एजेंसियों का मिलेगा साथ

​स्थानीय और पारंपरिक वस्त्रों को आधुनिक फैशन के अनुकूल बनाने और उन्हें ग्लोबल मार्केट में बेचने के लिए सरकार दो बड़े कदम उठाने जा रही है:

​निफ्ट (NIFT) का सहयोग: राष्ट्रीय फैशन प्रौद्योगिकी संस्थान (NIFT) के विशेषज्ञ अब स्थानीय हथकरघा बुनकरों को आधुनिक डिजाइन, नवाचार (Innovation) और प्रोडक्ट डेवलपमेंट की ट्रेनिंग देंगे।

​सीधे एक्सपोर्टर्स से जुड़ाव: बिचौलियों को खत्म करने और शिल्पकारों को उनके उत्पाद की सही कीमत दिलाने के लिए उन्हें सीधे निर्यात एजेंसियों (Export Agencies) से जोड़ा जाएगा, जिससे बस्तर और छत्तीसगढ़ के उत्पाद अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंच सकें।

​🌿 पर्यावरण के अनुकूल उत्पाद और मिश्रित खेती की रणनीति

​बैठक में पारंपरिक उद्योगों को इको-फ्रेंडली और ज्यादा मुनाफे वाला बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण रणनीतियों पर मुहर लगी:

​प्राकृतिक रंग (Natural Dyeing): रसायनों (Chemicals) के इस्तेमाल को कम करने के लिए हल्दी, कत्था, मेहंदी और फूलों से तैयार प्राकृतिक रंगों का उपयोग बढ़ाया जाएगा।

​मिश्रित खेती (Mixed Farming): रेशम कीटपालकों की कमाई बढ़ाने के लिए अब रेशम केंद्रों में खाली जमीन पर फूलों की खेती (फ्लोरीकल्चर) और सब्जी उत्पादन भी किया जाएगा।

​फ्यूजन प्रोडक्ट्स: सिल्क और कॉटन के साथ अन्य प्राकृतिक रेशों (Natural Fibers) को मिलाकर नए, फैशनेबल और आकर्षक कपड़े तैयार किए जाएंगे।

​👥 बैठक में शामिल रहे जनप्रतिनिधि और अधिकारी

​इस उच्च स्तरीय बैठक में छत्तीसगढ़ के ग्रामीण विकास को गति देने के लिए कई वरिष्ठ जनप्रतिनिधि और अधिकारी मौजूद रहे:

​श्री बृजमोहन अग्रवाल (सांसद, रायपुर लोकसभा)

​श्रीमती शालिनी राजपूत (अध्यक्ष, छत्तीसगढ़ हस्तशिल्प विकास बोर्ड)

​श्री राकेश पाण्डेय (अध्यक्ष, छत्तीसगढ़ खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड)

​श्री भोजराज देवांगन (अध्यक्ष, छत्तीसगढ़ राज्य हथकरघा विकास एवं विपणन संघ)

​श्री राजेश सिंह राणा (सचिव, ग्रामोद्योग विभाग)

​श्री जयप्रकाश मौर्य (प्रबंध संचालक, छत्तीसगढ़ माटी कला एवं हस्तशिल्प बोर्ड)

​श्रीमती लीना कमलेश मंडावी (प्रबंध संचालक, छत्तीसगढ़ खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड)

बस्तर के लिए मंजूर हुए नए प्रोजेक्ट और केंद्र-राज्य के इस साझा प्रयास से छत्तीसगढ़ के ग्रामीण और कुटीर उद्योग को एक नया कॉर्पोरेट और ग्लोबल लुक मिलने जा रहा है। इससे प्रदेश के लाखों बुनकरों, शिल्पियों, महिलाओं और युवाओं के जीवन स्तर में एक बड़ा और क्रांतिकारी बदलाव देखने को मिलेगा।

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