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करोड़ों के विकास कार्य पर उठे सवाल: कुछ ही दिनों में धंसी चेकर टाइल्स, विभाग की कार्यप्रणाली कठघरे में

बालोद। शहर के राजनांदगांव रोड स्थित संजीवनी अस्पताल के सामने सड़क चौड़ीकरण एवं सौंदर्यीकरण के तहत कराया गया निर्माण कार्य पूरा होने के कुछ ही दिनों में सवालों के घेरे में आ गया है। पैदल यात्रियों की सुविधा के लिए बिछाई गई चेकर टाइल्स कई स्थानों पर धंसने लगी हैं, जिसके बाद अब ठेकेदार उन्हीं टाइल्स को उखाड़कर दोबारा बिछाने में जुटा है। इस स्थिति ने न केवल निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर प्रश्नचिह्न लगा दिया है, बल्कि संबंधित विभाग की निगरानी व्यवस्था और कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

स्थानीय लोगों का कहना है कि विकास कार्यों का उद्देश्य आम नागरिकों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना होता है, लेकिन यदि करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद निर्माण कुछ ही दिनों में जवाब देने लगे तो यह जनभावनाओं के साथ न्याय नहीं है। नागरिकों का आरोप है कि यदि कार्य के दौरान तकनीकी मानकों का गंभीरता से पालन किया जाता और विभागीय स्तर पर नियमित निरीक्षण होता, तो इतनी जल्दी मरम्मत की नौबत नहीं आती।

जानकारी के अनुसार सड़क के दोनों ओर पैदल आवागमन को सुरक्षित बनाने के लिए चेकर टाइल्स बिछाई गई थीं। लेकिन टाइल्स के नीचे की सतह कई स्थानों पर बैठ जाने से पूरी संरचना प्रभावित हो गई। अब उन्हीं टाइल्स को हटाकर दोबारा बेस तैयार किया जा रहा है, जिससे यह सवाल और गहरा हो गया है कि क्या निर्माण कार्य शुरू से ही निर्धारित गुणवत्ता मानकों के अनुरूप किया गया था।

शहरवासियों का कहना है कि विकास कार्यों में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका गुणवत्ता नियंत्रण और विभागीय निगरानी की होती है। यदि कार्य पूरा होने के कुछ ही दिनों में उसकी मरम्मत करनी पड़े, तो यह केवल निर्माण एजेंसी ही नहीं, बल्कि निगरानी करने वाले जिम्मेदार अधिकारियों की कार्यशैली पर भी सवाल खड़े करता है। लोगों का मानना है कि सरकारी धन से किए जाने वाले कार्यों में जवाबदेही सुनिश्चित होना उतना ही आवश्यक है जितना कि निर्माण कार्य का समय पर पूरा होना।

राहगीरों ने यह भी कहा कि फुटपाथ पैदल चलने वालों की सुरक्षा और सुविधा के लिए बनाए जाते हैं, लेकिन धंसी हुई टाइल्स अब दुर्घटना की आशंका बढ़ा रही हैं। इससे लोगों में नाराजगी है और वे चाहते हैं कि केवल मरम्मत तक मामला सीमित न रहे, बल्कि पूरे निर्माण कार्य की तकनीकी जांच कराई जाए और यदि कहीं लापरवाही सामने आती है तो संबंधित जिम्मेदारों की जवाबदेही तय की जाए।

फिलहाल ठेकेदार द्वारा धंसी हुई टाइल्स को दोबारा बिछाने का कार्य जारी है, लेकिन यह पूरा मामला इस बात का संकेत भी है कि विकास कार्यों में केवल निर्माण पूरा कर देना पर्याप्त नहीं है। जब तक गुणवत्ता, पारदर्शिता और विभागीय जवाबदेही सुनिश्चित नहीं होगी, तब तक ऐसे कार्य जनता के विश्वास को मजबूत करने के बजाय उस पर सवाल खड़े करते रहेंगे।

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