बालोद। मानसून की पहली तेज बारिश ने ही नगर पालिका प्रशासन की बरसात पूर्व तैयारियों की हकीकत उजागर कर दी है। शहर के कई वार्डों में जलभराव, ओवरफ्लो होती नालियां और अव्यवस्थित जल निकासी व्यवस्था के कारण आम नागरिकों के साथ-साथ किसान भी भारी परेशानियों का सामना कर रहे हैं। सबसे गंभीर स्थिति वार्ड क्रमांक 12 में देखने को मिल रही है, जहां खेतों में बड़े पैमाने पर पानी भर जाने से खेती-किसानी प्रभावित हो गई है।
स्थानीय लोगों के अनुसार, वार्ड 12 में ड्रेनेज सिस्टम पूरी तरह से फेल हो चुका है। बारिश का पानी निकलने की कोई समुचित व्यवस्था नहीं होने से आसपास के खेत तालाब का रूप ले चुके हैं। ऐसे समय में जब किसान खरीफ फसलों की तैयारी में जुटे हैं, खेतों में जलभराव ने उनकी चिंता बढ़ा दी है। किसानों का कहना है लगभग 6 से 7 वार्ड का पानी यहां आकर जमा हो जाता है यदि समय रहते पानी की निकासी नहीं हुई तो बोवनी प्रभावित होगी और आर्थिक नुकसान उठाना पड़ेगा।
वार्ड 12 के पार्षद सुप्रीम शर्मा तथा संबंधित जमीन मालिकों ने बताया कि इस समस्या को लेकर नगर पालिका में लिखित आवेदन दिया जा चुका है। अधिकारियों को ड्रेनेज सिस्टम की खराब स्थिति और संभावित जलभराव की जानकारी पहले से थी, लेकिन बरसात शुरू होने से पहले किसी प्रकार की ठोस कार्रवाई नहीं की गई। अब हालात ऐसे बन गए हैं कि खेत पूरी तरह पानी में डूब गए हैं।
केवल वार्ड 12 ही नहीं, शहर के कई अन्य वार्डों में भी नालियां ओवरफ्लो हो रही हैं। नियमित सफाई नहीं होने के कारण गंदा पानी सड़कों पर बह रहा है, जिससे लोगों का पैदल चलना और वाहनों का आवागमन भी मुश्किल हो गया है। कई स्थानों पर बदबू और गंदगी फैलने से संक्रामक बीमारियों का खतरा भी बढ़ गया है।
स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि हर वर्ष बरसात से पहले नालियों की सफाई और जल निकासी व्यवस्था दुरुस्त करने के बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर स्थिति बिल्कुल विपरीत दिखाई देती है। पहली ही बारिश में शहर के कई हिस्सों का जलमग्न हो जाना प्रशासनिक लापरवाही को उजागर करता है।
क्षेत्रवासियों और किसानों ने जिला प्रशासन एवं नगर पालिका से तत्काल प्रभावी कार्रवाई की मांग करते हुए कहा है कि जल निकासी की समुचित व्यवस्था की जाए, बंद नालियों की सफाई कराई जाए तथा ड्रेनेज सिस्टम को जल्द दुरुस्त किया जाए, ताकि किसानों की फसलें बच सकें और आम जनता को राहत मिल सके। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते समस्या का समाधान नहीं हुआ तो उन्हें आंदोलन का रास्ता अपनाने के लिए मजबूर होना पड़ेगा।