डौंडी लोहारा। क्या लोक निर्माण विभाग (PWD) किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है? क्या सड़क के बीच बने जानलेवा गड्ढे को सुरक्षित और स्थायी तरीके से दुरुस्त करने के बजाय महज खानापूर्ति कर विभाग अपनी जिम्मेदारी पूरी मान रहा है? डौंडी लोहारा से राजनांदगांव मार्ग पर संबलपुर के आगे खैरीडीह गांव के ठीक पहले सामने आई तस्वीरें विभाग की कार्यप्रणाली और सड़क सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर रही हैं।
सड़क के बीचों-बीच बने पुल पर बड़ा और गहरा गड्ढा दिखाई दे रहा है। हैरानी की बात यह है कि इस गड्ढे की मरम्मत के नाम पर उसमें बोरियां भरकर डाल दी गई हैं। यह सवाल अब राहगीरों और वाहन चालकों के बीच उठने लगा है।
मरम्मत या महज खानापूर्ति?
सड़क के बीच मौजूद गड्ढे को देखकर सबसे पहला सवाल यही उठता है कि क्या यह अस्थायी व्यवस्था किसी हादसे को रोकने के लिए पर्याप्त है? तस्वीरों में गड्ढे के आसपास गिट्टी और निर्माण सामग्री भी दिखाई दे रही है। यदि सड़क की मरम्मत का काम चल रहा है तो वाहन चालकों को पर्याप्त दूरी से सावधान करने के लिए स्पष्ट चेतावनी बोर्ड, रेडियमयुक्त संकेतक, बैरिकेडिंग और रात में दिखाई देने वाली प्रभावी सुरक्षा व्यवस्था क्यों नहीं दिखाई दे रही?
सड़क पर दौड़ने वाले वाहन चालकों के लिए अचानक सामने आया ऐसा अवरोध बेहद जोखिमपूर्ण हो सकता है। खासकर रात के समय जब सड़क की दृश्यता कम हो जाती है, तब दूर से गड्ढे की स्थिति का अंदाजा लगाना मुश्किल हो सकता है।
रात में बढ़ जाता है खतरा
दिन के उजाले में किसी तरह गड्ढा दिखाई भी दे जाए, लेकिन रात के समय स्थिति और गंभीर हो सकती है। सड़क के बीच बने गड्ढे में बोरियां डालकर छोड़ देना और उसके आसपास पर्याप्त चेतावनी व्यवस्था नहीं करना वाहन चालकों के लिए परेशानी का कारण बन सकता है।
अनजान वाहन चालक को यदि समय रहते सड़क की स्थिति का संकेत नहीं मिले तो वह अचानक ब्रेक लगाने या वाहन को दूसरी दिशा में मोड़ने को मजबूर हो सकता है। ऐसी स्थिति में पीछे से आ रहे वाहनों के लिए भी खतरा पैदा हो सकता है।
या नहीं, यह भी बड़ा सवाल है। यदि विभाग को पता है कि सड़क के बीच बड़ा गड्ढा मौजूद है और वहां से लगातार वाहनों की आवाजाही हो रही है, तो फिर सुरक्षा के व्यापक इंतजाम क्यों नहीं किए गए?
स्थानीय लोगों और वाहन चालकों का सवाल है कि जब किसी सड़क पर खतरा स्पष्ट दिखाई दे रहा हो तो विभाग को स्थायी मरम्मत होने तक कम से कम ऐसी व्यवस्था करनी चाहिए जिससे वाहन चालकों को काफी पहले से खतरे की जानकारी मिल सके।
‘हादसा होने के बाद जागेगा विभाग?’
सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या विभाग किसी बड़े हादसे के बाद ही इस समस्या को गंभीरता से लेगा? सड़क के बीच गड्ढा होना अपने आप में चिंता का विषय है, लेकिन उससे भी अधिक चिंता की बात तब हो जाती है जब उसकी मरम्मत के नाम पर अस्थायी इंतजाम कर उसे लंबे समय तक छोड़ दिया जाए।
डौंडी लोहारा-राजनांदगांव मार्ग पर संबलपुर के आगे खैरीडीह गांव के ठीक पहले की यह स्थिति संबंधित विभाग के लिए चेतावनी जैसी है। जरूरत इस बात की है कि विभाग मौके का तत्काल निरीक्षण करे, गड्ढे की सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण स्थायी मरम्मत कराए तथा तब तक पर्याप्त रेडियमयुक्त चेतावनी संकेतक, बैरिकेडिंग और रात्रिकालीन सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करे।
अब देखना यह है कि विभाग तस्वीरों में दिखाई दे रही इस स्थिति को गंभीरता से लेकर कार्रवाई करता है या फिर किसी अनहोनी के बाद ही जिम्मेदार अधिकारियों की नींद खुलेगी।