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बालोद: आदर्श विवाह में गूंजा ‘जय श्री राम’, 6 परिवारों ने की घर वापसी; गंगाजल से पैर पखारकर हुआ स्वागत

बालोद।

छत्तीसगढ़ के बालोद जिले से एक बड़ी खबर सामने आ रही है, जहाँ सामाजिक समरसता और आस्था का एक अनूठा संगम देखने को मिला। तहसील साहू समाज बालोद द्वारा ग्राम मेढ़की में आयोजित ‘आदर्श सामूहिक विवाह’ कार्यक्रम उस वक्त ऐतिहासिक बन गया, जब 10 जोड़ों के विवाह के साथ-साथ 6 धर्मांतरित परिवारों ने पुनः हिंदू धर्म में वापसी की।

रीति-रिवाज के साथ संपन्न हुआ विवाह

मेढ़की गांव में आयोजित इस कार्यक्रम में सामाजिक और धार्मिक रीति-रिवाजों के साथ 10 जोड़ों का सामूहिक विवाह संपन्न कराया गया। इस दौरान समाज के बुजुर्गों और अतिथियों ने नवदंपत्तियों को सुखद दांपत्य जीवन का आशीर्वाद दिया।

पहली बार आदर्श विवाह के मंच से ‘घर वापसी’

संभवतः छत्तीसगढ़ में यह पहला अवसर है जब किसी आदर्श विवाह के मंच से इतनी बड़ी संख्या में परिवारों ने स्वेच्छा से घर वापसी की हो। धर्मांतरित होकर दूसरे र्को धर्म अपना चुके 6परिवारों ने सार्वजनिक रूप से हिंदू धर्म में लौटने का निर्णय लिया।

सम्मान का अनूठा तरीका:

मंच पर मौजूद अतिथियों ने घर वापसी करने वाले सभी सदस्यों का आत्मीय स्वागत किया। विधि-विधान के साथ उनके पैर गंगाजल से धोए गए। इसके पश्चात उन्हें पवित्र ग्रंथ श्रीमद्भगवद्गीता, रामायण और भक्त माता कर्मा की प्रतिमा भेंट कर समाज की मुख्यधारा में पुनः शामिल किया गया। इस दौरान पूरा पंडाल ‘जय श्री राम’ के जयकारों से गूंज उठा।

क्यों बदला था धर्म?

घर वापसी करने वाले सदस्यों ने बताया कि अतीत में कुछ गंभीर शारीरिक समस्याओं और व्यक्तिगत परेशानियों के चलते उन्होंने भ्रमवश धर्मांतरण कर लिया था। लेकिन हिंदू संगठनों के कार्यकर्ताओं और साहू समाज के पदाधिकारियों के मार्गदर्शन के बाद उन्हें अपनी जड़ों की ओर लौटने की प्रेरणा मिली।

जिम्मेदारों ने क्या कहा?

  • प्रेम साहू (अध्यक्ष, तहसील साहू संघ बालोद): “समाज को एकजुट रखना और भटके हुए लोगों को ससम्मान वापस लाना हमारी प्राथमिकता है। आज का यह कार्यक्रम सामाजिक एकता का प्रतीक है।”

  • बलराम गुप्ता (जिलाध्यक्ष, विश्व हिंदू परिषद): “सनातन धर्म की ओर लौटते परिवारों का हम स्वागत करते हैं। यह उनकी आस्था की जीत है।”

  • सत्या साहू (विश्व हिंदू परिषद): “लगातार प्रयासों और समझाइश के बाद आज इन परिवारों ने अपनी स्वेच्छा से घर वापसी की है, जो पूरे जिले के लिए गर्व का विषय है।”

यह आयोजन न केवल सामाजिक सुधार की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है, बल्कि जिले में चर्चा का केंद्र भी बना हुआ है।

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