बालोद। नगर पालिका क्षेत्र बालोद में जहां एक ओर गंगासागर तालाब पर लाखों-करोड़ों रुपये खर्च कर विकास कार्य, सौंदर्यीकरण और योजनाओं का प्रचार किया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर शहर के वार्ड क्रमांक 7 में स्थित रिटिया तालाब और काशी बन तालाब वर्षों से उपेक्षा, गंदगी और बदहाल स्थिति का सामना कर रहे हैं। इस गंभीर जनसमस्या को लेकर जनहित में समर्पित जनसेवक उमेश कुमार सेन ने नगर पालिका प्रशासन के समक्ष जोरदार आवाज उठाई है।
उमेश कुमार सेन ने कहा कि बालोद शहर केवल एक तालाब का नाम नहीं है, बल्कि यहां कई ऐतिहासिक, धार्मिक और जनउपयोगी तालाब मौजूद हैं, जिनका संरक्षण करना प्रशासन की जिम्मेदारी है। यदि गंगासागर तालाब पर लाखों-करोड़ों रुपये खर्च किए जा सकते हैं, तो वार्ड क्रमांक 7 के रिटिया तालाब और काशी बन तालाब को आखिर क्यों नजरअंदाज किया जा रहा है?
उन्होंने कहा कि वर्षों से इन तालाबों की नियमित सफाई नहीं हुई है। तालाबों में जलकुंभी, गंदगी, झाड़ियां, कचरा और कीचड़ जमा है। दोनों तालाबों की स्थिति इतनी दयनीय हो चुकी है कि पानी काला पड़ चुका है, बदबू फैल रही है और स्वच्छता का नामोनिशान नहीं है। इसके बावजूद क्षेत्र के अनेक लोग मजबूरीवश इसी पानी का उपयोग दैनिक कार्यों, स्नान तथा अन्य जरूरतों के लिए करने को विवश हैं। यह स्थिति सीधे तौर पर जनस्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बनती जा रही है।
उमेश कुमार सेन ने प्रशासन से सवाल किया कि क्या नगर पालिका का विकास केवल कुछ चुनिंदा स्थानों तक सीमित है? क्या वार्ड क्रमांक 7 के नागरिक करदाता नहीं हैं? क्या उन्हें स्वच्छ और सुंदर वातावरण में रहने का अधिकार नहीं है?
उन्होंने कहा कि बालोद नगर पालिका अंतर्गत कुल 16 तालाब बताए जाते हैं, जो नगर की जल धरोहर, पर्यावरण संतुलन और भविष्य की अमूल्य संपत्ति हैं। लेकिन सवाल यह उठता है कि इन 16 तालाबों में से आखिर कितने तालाबों का वास्तविक उद्धार हुआ है? कितनों की सफाई हुई, कितनों का गहरीकरण हुआ, कितनों का संरक्षण हुआ और कितनों को योजनाओं का लाभ मिला? यदि नगर में 16 तालाब हैं, तो विकास केवल एक-दो तालाबों तक सीमित क्यों दिखाई देता है? यह प्रश्न अब आम जनता के बीच चर्चा का विषय बन चुका है।
उन्होंने कहा कि रिटिया तालाब और काशी बन तालाब कभी क्षेत्र की पहचान हुआ करते थे। यहां जल संरक्षण होता था, पशु-पक्षियों को पानी मिलता था और स्थानीय लोग धार्मिक व सामाजिक कार्यों में भी इन तालाबों का उपयोग करते थे। लेकिन आज प्रशासनिक उदासीनता के कारण ये तालाब धीरे-धीरे समाप्ति की ओर बढ़ रहे हैं।
उमेश Kumar सेन ने मांग की है कि नगर पालिका प्रशासन तत्काल दोनों तालाबों का सर्वे कराए, सफाई अभियान चलाए, गहरीकरण कराए, सौंदर्यीकरण की योजना बनाए तथा स्थायी संरक्षण के लिए बजट स्वीकृत करे। साथ ही सभी वार्डों में समान विकास नीति लागू की जाए।
उन्होंने कहा कि तालाब केवल पानी भरने की जगह नहीं होते, बल्कि ये हमारी संस्कृति, पर्यावरण और भविष्य की धरोहर हैं। यदि इन्हें नहीं बचाया गया तो आने वाली पीढ़ियां प्रशासन की इस लापरवाही को कभी माफ नहीं करेंगी।
अब बालोद की जनता यह जानना चाहती है कि नगर पालिका प्रशासन सभी 16 तालाबों को समान महत्व देगा या विकास कार्य केवल एक-दो स्थानों तक सीमित रहेंगे।