
बालोद |
विश्व मलेरिया दिवस के अवसर पर बालोद जिले को मलेरिया मुक्त बनाने के संकल्प के साथ स्वास्थ्य विभाग ने एक विशेष अभियान की शुरुआत की है। इस वर्ष की थीम “मलेरिया को समाप्त करने के लिए प्रेरित: अब हम कर सकते हैं, अब हमें करना ही होगा” के तहत गुरुवार को जिला अस्पताल परिसर से जनजागरूकता रथ को रवाना किया गया।
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) डॉ. जे.एल. उइके ने इस रथ को हरी झंडी दिखाई। यह रथ जिले के शहरी और ग्रामीण अंचलों में भ्रमण कर लोगों को मलेरिया से बचाव के प्रति जागरूक करेगा।
जनसहभागिता से ही संभव है मलेरिया का खात्मा: डॉ. उइके
कार्यक्रम के दौरान डॉ. उइके ने अपील करते हुए कहा कि मलेरिया एक गंभीर बीमारी है, लेकिन सतर्कता और जनसहभागिता से इसे पूरी तरह रोका जा सकता है। उन्होंने जोर दिया कि जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग बालोद को मलेरिया मुक्त बनाने के लिए मिशन मोड पर काम कर रहा है।
मलेरिया से बचाव के लिए स्वास्थ्य विभाग की गाइडलाइन
लक्षण पहचानें: तेज बुखार, ठंड के साथ कंपकंपी, सिरदर्द, उल्टी और अत्यधिक कमजोरी मलेरिया के संकेत हो सकते हैं।
रोकथाम ही इलाज: घर के आसपास पानी जमा न होने दें। कूलर, टंकी और गमलों का पानी सप्ताह में कम से कम एक बार जरूर बदलें।
सुरक्षा के उपाय: सोते समय मच्छरदानी का उपयोग करें, शरीर को ढकने वाले कपड़े पहनें और खिड़की-दरवाजों पर जाली लगवाएं।
डॉक्टर की सलाह अनिवार्य: बुखार आने पर खुद से दवा न लें, तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र में निःशुल्क जांच और उपचार कराएं।
कार्यक्रम में ये रहे उपस्थित
डॉ. जितेंद्र सिंह (जिला टीकाकरण अधिकारी)
अखिलेश शर्मा (जिला कार्यक्रम प्रबंधक)
सूर्यकान्त साहू (जिला सलाहकार)
प्रवीण नायक (विकासखंड कार्यक्रम प्रबंधक)
भुपेश देवांगन (जिला डाटा प्रबंधक)
रितेश गंगबेर, मिथलेश देशमुख, सत्येंद्र साहू, पीनेश एवं अन्य स्वास्थ्य कर्मी।
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