Skip to main content

Sachkaaina

Home / बालोद जिला / कलेक्टर दिव्या उमेश मिश्रा की अनूठी पहल: ‘एक पेड़ महिलाओं के नाम’ अभियान से हरियाली की नई मिसाल पेश करेगा बालोद

कलेक्टर दिव्या उमेश मिश्रा की अनूठी पहल: ‘एक पेड़ महिलाओं के नाम’ अभियान से हरियाली की नई मिसाल पेश करेगा बालोद

बालोद। जिला 30 जुलाई को एक ऐसे ऐतिहासिक पल का साक्षी बनने जा रहा है, जो केवल जिले ही नहीं बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ के पर्यावरण संरक्षण अभियान में एक नई मिसाल कायम कर सकता है। कलेक्टर दिव्या उमेश मिश्रा की दूरदर्शी सोच और नवाचार से शुरू हुआ “एक पेड़ महतारी के नाम” अभियान अब एक विशाल जनआंदोलन का रूप ले चुका है। इस अभियान के तहत जिले की लगभग ढाई लाख महिलाएं एक ही दिन अपने हाथों से पौधे लगाकर हरियाली का नया इतिहास रचेंगी। यह महज एक सरकारी कार्यक्रम नहीं, बल्कि मां, मातृभूमि और प्रकृति के प्रति सम्मान और जिम्मेदारी का ऐसा भावनात्मक अभियान है, जिसमें हर पौधा एक मां के नाम समर्पित होगा और हर महिला उसके संरक्षण का संकल्प भी लेगी। पर्यावरण संरक्षण को सामाजिक आंदोलन का स्वरूप देने की यह अनूठी पहल प्रदेश में अपनी तरह का सबसे बड़ा अभियान मानी जा रही है। जिला प्रशासन ने इस ऐतिहासिक आयोजन को सफल बनाने के लिए महीनों से व्यापक तैयारियां की हैं। जिले की सभी ग्राम पंचायतों, नगरीय निकायों, स्कूलों, कॉलेजों, आंगनबाड़ी केंद्रों, शासकीय कार्यालयों और सार्वजनिक स्थलों पर एक साथ पौधरोपण किया जाएगा। अभियान में महतारी वंदन योजना की हितग्राही महिलाओं के साथ स्वयं सहायता समूह, पंचायत प्रतिनिधि, विद्यार्थी, शिक्षक, सामाजिक संगठन और आम नागरिक भी सक्रिय भागीदारी निभाएंगे

पौधे जिले की हरियाली और स्वच्छ पर्यावरण की पहचान बनें- दिव्या

कलेक्टर दिव्या उमेश मिश्रा ने इस अभियान को केवल पौधे लगाने तक सीमित नहीं रखा है। उन्होंने सभी विभागों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि लगाए गए प्रत्येक पौधे की सुरक्षा, सिंचाई और नियमित देखभाल सुनिश्चित की जाए, ताकि आने वाले वर्षों में यही पौधे जिले की हरियाली और स्वच्छ पर्यावरण की पहचान बनें। अभियान की लगातार समीक्षा स्वयं कलेक्टर द्वारा की जा रही है और प्रत्येक विभाग को लक्ष्य निर्धारित कर जिम्मेदारी सौंपी गई है। इस अभियान की सबसे बड़ी विशेषता महिलाओं की अभूतपूर्व भागीदारी है। आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से पौधों का वितरण किया जा रहा है और गांव-गांव में महिलाओं को इस अभियान से जोड़ने के लिए विशेष जनजागरूकता अभियान चलाया गया है। प्रशासन का उद्देश्य है कि प्रत्येक महिला अपने लगाए हुए पौधे को अपने परिवार के सदस्य की तरह संरक्षित करे।

पहल इतिहास में स्वर्णिम अक्षरों में दर्ज होने जा रही-

बढ़ते तापमान, जलवायु परिवर्तन और घटते वन क्षेत्र जैसी चुनौतियों के बीच यह पहल केवल हरियाली बढ़ाने का प्रयास नहीं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण के प्रति जनचेतना जगाने का सशक्त माध्यम भी बनेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस अभियान में लगाए गए पौधों का संरक्षण सुनिश्चित हुआ तो बालोद आने वाले वर्षों में प्रदेश के सबसे हरित जिलों में अपनी पहचान बना सकता है। 30 जुलाई को जब जिले के कोने-कोने में ढाई लाख महिलाएं एक साथ पौधरोपण करेंगी, तब यह दृश्य केवल एक कार्यक्रम नहीं बल्कि जनशक्ति, मातृशक्ति और प्रकृति के प्रति सामूहिक संकल्प का प्रतीक होगा। यह अभियान इस बात का संदेश देगा कि पर्यावरण बचाने की सबसे बड़ी ताकत समाज की भागीदारी है। कलेक्टर दिव्या उमेश मिश्रा की यह पहल निश्चित रूप से बालोद के इतिहास में स्वर्णिम अक्षरों में दर्ज होने जा रही है। “एक पेड़ महतारी के नाम” केवल वृक्षारोपण अभियान नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को हरित, सुरक्षित और समृद्ध भविष्य देने का ऐसा संकल्प है, जिसकी गूंज लंबे समय तक पूरे प्रदेश में सुनाई देगी

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!