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बालोद कुदरत का टेस्ट, सिस्टम फेल: करोड़ों की नाली और साफ करने पहुंचे ‘सब्बल’धारी, बालोद में विकास की अजब तस्वीर!

बालोद। जिला मुख्यालय बालोद में बुधवार देर शाम मौसम ने अचानक करवट बदली। तेज आंधी-तूफान के बाद करीब एक घंटे तक हुई झमाझम बारिश ने लोगों को भीषण गर्मी और उमस से राहत तो दी, लेकिन शहर के ड्रेनेज सिस्टम की हकीकत भी उजागर कर दी। शहर के कई हिस्सों में जलभराव की स्थिति निर्मित हो गई, जिससे आम जनजीवन प्रभावित हुआ और सड़कों पर लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा।

सबसे दिलचस्प और विडंबनापूर्ण नजारा दल्लीराजहरा चौक में देखने को मिला। बारिश थमते ही सड़क किनारे पानी भरने की शिकायत स्थानीय दुकानदारों ने लोक निर्माण विभाग तक पहुंचाई। सूचना मिलते ही विभागीय अमला मौके पर पहुंचा, लेकिन आधुनिक संसाधनों के बजाय हाथों में सब्बल (लोहे का सरिया) लेकर। हाल ही में निर्मित नई नालियों की सफाई सरिये से कर पानी निकासी का रास्ता तलाशा जाने लगा।

इसी दौरान जब स्थानीय पत्रकारों ने इस पूरे घटनाक्रम को कैमरे में कैद करना शुरू किया तो मौके पर मौजूद एक अधिकारी हेलमेट से अपना चेहरा छिपाते नजर आए। यह दृश्य मानो खुद बयां कर रहा था कि सवाल सिर्फ बारिश का नहीं, बल्कि व्यवस्था की तैयारी और निर्माण की गुणवत्ता का भी है।

दरअसल, दल्लीराजहरा चौक से मधु चौक होते हुए राजनांदगांव मुख्य मार्ग तक सड़क चौड़ीकरण एवं सौंदर्यीकरण का कार्य जारी है। निर्माण कार्य शुरू होने के बाद से ही गुणवत्ता और तकनीकी खामियों को लेकर स्थानीय लोगों की शिकायतें सामने आती रही हैं। अब पहली ही तेज बारिश ने उन आशंकाओं को और मजबूत कर दिया है।

व्यंग्य यही है कि करोड़ों की योजनाओं से बने ड्रेनेज सिस्टम की परीक्षा प्रकृति ने ली, लेकिन नतीजा सरिये के भरोसे निकला। सवाल यह है कि यदि एक घंटे की बारिश में ही व्यवस्था पानी-पानी हो जाए, तो मानसून की असली दस्तक पर शहर का क्या हाल होगा?

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